
कोरोंना के नाम पर निजी अस्पतालों में लूट का खेल शुरू
जनपथ टुडे, जबलपुर, 31 जुलाई 2020, अब तक कोरोना से पीड़ित लोगों का इलाज शासकीय अस्पतालों में पूरी तरह निशुल्क और सरकारी सुविधाओं पर हो रहा था। किन्तु विगत दिनों जबलपुर जिला प्रशासन द्वारा के निजी अस्पतालों को कोरोना के इलाज हेतु अधिकृत कर दिया गया है।
इसके लिए जब जिला प्रशासन और निजी अस्पतालों के संचालकों की बैठक हो रही थी तभी महानगर के कुछ समाचार पत्रों ने इस बात की आशंका जाहिर की थी कि यदि जिला प्रशासन ने निजी अस्पतालों में कोरोना के इलाज के लिए न्यूनतम और अधिकतम शुल्क निर्धारित नहीं किया तो, कोरोना और उसके भय से पीड़ित लोगों के साथ निजी अस्पताल लूट का खेल शुरू कर देगे।
प्रशासन ने निजी अस्पतालों पर कोरोना के उपचार के लिए किसी भी तरह के शुल्क तय नहीं किए और अब शहर के अख़बारों में ऐसी कई खबरे प्रकाश में आ रही है जिससे पता चलता है कि मौके का फायदा उठाते हुए निजी अस्पतालों में लूट का रास्ता खुल चुका है।
बताया जाता है कि जिन संदिग्ध मरीजों में कोरोना के हल्के लक्षण नजर आ रहे है और साधारण उपचार हो रहा है जिनको ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और आईसीयू में नहीं रखा गया है उनसे भी प्रतिदिन 12 से 15 हजार रूपए निजी अस्पतालों द्वारा वसूले जा रहे। है। आगे यदि कोरोना से पीड़ित गंभीर मरीज जिन्हें ऑक्सीजन और वेंटिलेटर पर रखने की आवश्यकता पड़ सकती है उनसे इन निजी अस्पतालों द्वारा घंटे के हिसाब से हजारों रुपए वसूले जाने की भी संभावनाएं है।
गौरतलब है कि अभी तक देश में कोरोना संक्रमित पाए गए लोगों का इलाज प्रशासन की देखरेख में सरकारी अस्पतालों में होता रहा है, कुछ बड़े शहरों के खास निजी अस्पतालों को ही कोरोना के उपचार की अनुमति दी गई थी, किन्तु अब सभी श्रेणी के शहरों में यह अनुमति निजी अस्पतालों को दिए जाने के बाद इन अस्पताल की सूरत वाली कारोबारी दुकानों ने “आपदा को अवसर” में बदलने जरा भी देरी नहीं की है और यहां इलाज के नाम पर लूट की शुरुआत तो हो ही चुकी है साथ ही प्रशासन की देखरेख न होने से गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों की देख भाल और उन पर नियंत्रण में भी कोताही बरते जाने की संभावनाएं बढ़ेगी।
चर्चा तो ये भी है कि शहरों के अलावा छोटे जिलों में भी इसका असर पड़ सकता है, यहां के निजी अस्पतालों में भले कोरोना के इलाज नर्सिंग होम्स में संभव न हो, पर यहां से शहर के अस्पतालों में संधिग्ध मरीजों को भेजे जाने में भी कमीशन के खेल और दलाली की उम्मीद बहुत है। शहर में शुरू हो चुके इन लूट के अड्डों तक ग्रामीण अंचल के मरीजों को पहुंचाने वाले डाक्टरों और एंबुलेंस चालकों की जेबों में मोटी दलाली की रकम पहुंचाने की तैयारियां होने लगी है और बताया जाता है क्षेत्रों में माफिया सक्रिय होने लगे है जो जिला स्तर पर सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं में कमिया और उनकी बदहाली की झूठी कहानियां अभी से गढ़ने लगे है।