
विभागीय योजनाओं को पूर्ण करने कलेक्टर ने दिए निर्देश
जनपद टुडे 22 जुलाई 2025
कलेक्टर श्रीमती नेहा मारव्या की अध्यक्षता में कृषि, उद्यानिकी, सहकारिता एवं आत्मा सहित अन्य विभागों की विभागीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभागीय योजनाओं की समीक्षा की गई और अधिकारियों को दायित्वों के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए।
बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें श्री चंद्रपाल सिंह सैयाम सहायक संचालक उद्यानिकी विभाग, सुश्री अभिलाषा चौरसिया उपसंचालक (कृषि विभाग), डॉ. नेहा धुरिया (परियोजना संचालक आत्मा विभाग), शिद्धेश्वर सिंह मर्शकोले सहकारिता विभाग, जे.पी. द्विवेदी सहित अन्य संबंधित विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक का प्रांरभ उद्यानिकी विभाग की समीक्षा से की गई जिसमें कलेक्टर द्वारा गुलाब की खेती की जानकारी लेते हुए सहायक संचालक उद्यानिकी को गुलाब की खेती, उत्पादन एंव विपणन करने हेतु निर्देश दिए। प्लास्टिक मोल्डिंग के लाभों की जानकारी दी गई तथा जैविक खेती के लक्ष्य वरिष्ठालय से मांगने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने सहायक संचालक उद्यानिकी को विभागीय योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति हेतु निर्देश भी दिए गए।
सहकारिता विभाग को एम.टी, एल टी, ऋण वितरण हेतु प्रकरण जो शेष है उन्हें पूर्ण करने और नवाचार अंतर्गत कोदो – कुटकी प्रोसेसिंग यूनिट के डीपीआर की पूर्ण जानकारी प्रस्तुत की जिस पर कलेक्टर ने आवश्यक बेहतर करने के निर्देश दिए।
आत्मा परियोजना अधिकारी ने अपनी विभागीय कार्यो के विकास, लक्ष्य की प्रगति प्रस्तुत की। कलेक्टर ने जिले के किसानों को कृषि के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने हेतु आधुनिक कृषि औंजारो के साथ तरीके बताए गये जिससे उनकी वार्षिक आय में वृद्धि हो ।
उपसंचालक कृषि द्वारा जिले में खरीफ फसल के रकवा, विभागीय योजनांतर्गत प्राप्त लक्ष्यों और बीज फसल प्रदर्शन हेतु चयन प्रक्रिया की जानकारी प्रस्तुत की गई और कलेक्टर ने मृदा नमूना एकत्रीकरण शीघ्र पूर्ण करने हेतु निर्देश दिये। कलेक्टर ने कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान जिले के किसानों को अच्छे से अच्छा उत्तम बीज उपलब्ध कराये जाये और अपनी देख-रेख में फसल की बुवाई से लेकर कटाई तक फसल की उत्तम उत्पादन की प्रक्रिया की जाये ताकि किसानों को अधिक से अधिक फसल उत्पादन करने का ज्ञान प्राप्त हो सके। साथ ही साथ कलेक्टर ने कहा कि साल में ऐसी फसलों के बीज की बुवाई की जाये जिससे खेत में उर्वरक शक्ति आगामी फसल के लिए प्राप्त हो सके। इससे किसानों को अधिक से अधिक जागरूक किया जाये।