
पुरानी पेंशन बहाली को लेकर हुंकार: संयुक्त मोर्चा ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
उपसंपादक मोहम्मद साहिब 9406850186
जनपथ टुडे डिंडोरी 08 फरवरी 2026— आज जिला डिंडोरी में आजाद अध्यापक शिक्षक संघ जिला इकाई डिण्डौरी द्वारा प्रदेश के शिक्षकों की वर्षों से लंबित मांगों और ज्वलंत समस्याओं के निराकरण हेतु मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन के नाम जिला कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार उनकी जायज मांगों पर शीघ्र विचार नहीं करती है, तो शिक्षक संवर्ग उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
प्रमुख मांगें और मुद्दे
ज्ञापन में कुल 22 सूत्रीय मांगों का उल्लेख किया गया है, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
पुरानी पेंशन और वरिष्ठता: समस्त एन.पी.एस. धारक कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन (OPS) लागू करने और प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा अवधि की गणना करते हुए क्रमोन्नति व समयमान वेतनमान का लाभ देने की मांग की गई है।
आठवां वेतनमान: केंद्रीय कर्मचारियों की तर्ज पर 01 जनवरी 2026 से आठवें वेतनमान का लाभ देने का आग्रह किया गया है।
अनुकंपा नियुक्ति व संविलियन: दिवंगत शिक्षकों के आश्रितों को अविलंब अनुकंपा नियुक्ति देने, ‘गुरुजियों’ को वरिष्ठता प्रदान करने और जनजातीय कार्य विभाग के शिक्षकों को स्कूल शिक्षा विभाग में मर्ज करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
वेतन विसंगति और भुगतान: सितंबर 2022 की रुकी हुई हड़ताल अवधि का वेतन भुगतान करने तथा नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति दिनांक से ही 100% वेतन प्रदान करने की मांग की गई है।
अन्य सुविधाएं: शिक्षकों के लिए कैशलेस मेडिकल क्लेम, सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने, शनिवार का अवकाश देने और दोषपूर्ण ई-अटेंडेंस प्रणाली को बंद करने की मांग भी शामिल है।
गुरुजियों और अतिथि शिक्षकों की स्थिति पर चिंता
संघ ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि वर्तमान में कई ‘गुरुजी’ मात्र 3000 रुपये और संविदा शिक्षक 5000 रुपये मासिक वेतन पर कार्य कर रहे हैं, जो कि बेहद चिंताजनक है। उन्हें प्राथमिक शिक्षक का न्यूनतम वेतनमान देने और अतिथि शिक्षकों को नियमित करते हुए अन्य शासकीय सुविधाएं प्रदान करने की अपील की गई है।
प्रशासनिक सुधार की मांग
संगठन ने यह भी मांग रखी है कि 50 प्रतिशत रिक्त पदों पर पदोन्नति की जाए और प्रशासनिक कार्यों से शिक्षकों को मुक्त रखा जाए ताकि वे शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित कर सकें।




