भोपाल डिक्लेरेशन–2 : दलित–आदिवासी के नाम पर एक और राजनीतिक स्वांग – इंजी. कमलेश तेकाम

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संपादक प्रकाश मिश्रा 8963976785
जनपथ टुडे डिण्डौरी 14 जनवरी 2026- गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर कमलेश तेकाम ने राज्यसभा सांसद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के द्वारा दिनांक 13 जनवरी 2026 को भोपाल के समन्वय भवन अपेक्स बैंक परिसर आयोजित भोपाल डिक्लेरेशन -2 कार्यकम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा की कार्यक्रम सामाजिक, आर्थिक न्याय का महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं बल्कि स्वयं को कांग्रेस में मजबूत करने का हल्का प्रयास हैं। उक्त आयोजन की कड़ी भर्त्सना करते हुए

प्रदेश अध्यक्ष कमलेश तेकाम ने कहा

भोपाल में आयोजित “भोपाल डिक्लेरेशन–2” को सामाजिक न्याय का नया अध्याय बताने की कोशिश की जा रही है, लेकिन हकीकत में यह आयोजन उसी पुरानी राजनीति का विस्तार है, जिसने पिछले 25 वर्षों में आदिवासी और दलित समाज को सिर्फ़ भाषण, ड्राफ्ट और झूठे सपने दिए हैं।गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर कमलेश तेकाम ने इस पूरे आयोजन को सीधे-सीधे भ्रम और बंटवारे की राजनीति करार दिया है। उनका कहना है कि जिन लोगों ने वर्षों तक सत्ता का सुख भोगा, वही आज फिर समाज को गुमराह करने के लिए नए नारों और नए डिक्लेरेशन के साथ मैदान में उतर आए हैं।सबसे बड़ा सवाल यह है किजिनकी सरकारें रहीं, जिनके हाथ में प्रशासन रहा, जिनके पास नीति और बजट था — उन्होंने किया क्या?

आदिवासी , दलित आज भी विस्थापन झेल रहा है

आदिवासी आज भी विस्थापन झेल रहा है, दलित आज भी हाशिये पर है, ज़मीन छीनी जा रही है, जंगल उजाड़े जा रहे हैं, और रोज़गार सिर्फ़ काग़ज़ों में पैदा हो रहा है। ज़मीनी हकीकत वही पुरानी है — बदली है तो सिर्फ़ भाषा और मंच। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर कमलेश तेकाम का साफ़ आरोप है कि आदिवासी और दलित समाज के नाम पर सबसे ज़्यादा भ्रष्टाचार इन्हीं तथाकथित सामाजिक ठेकेदारों ने किया है। सेमिनार, सम्मेलन और घोषणाओं के ज़रिये एक पूरा उद्योग खड़ा किया गया, जिसमें समाज को सिर्फ़ चेहरा बनाया गया और फ़ायदा चंद लोगों ने उठाया। जिनके पास न ज़मीन है, न संसाधन, न राजनीतिक ताक़त — उन्हीं को आगे खड़ा कर समाज को ठगने की नीति अब पुरानी पड़ चुकी है। उन्होंने कहा यह भी कोई संयोग नहीं है कि इन आयोजनों में संघर्ष शब्द से जानबूझकर परहेज़ किया जाता है। जंगल-जमीन-पानी, निजीकरण, कॉर्पोरेट लूट, विस्थापन, आरक्षण पर हमले — इन मुद्दों पर न कोई ठोस योजना है, न संघर्ष की घोषणा। सिर्फ़ “संवाद”, “ड्राफ्ट” और “भविष्य की तारीख़ें” हैं।

ऐसे आयोजन समाज को संगठित करने के बजाय भ्रमित और विभाजित करते हैं

प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर कमलेश तेकाम ने कहा इस मामले में सबसे खतरनाक बात यह है कि ऐसे आयोजन समाज को संगठित करने के बजाय भ्रमित और विभाजित करते हैं। असली सवालों से ध्यान हटाकर नई-नई समितियों, घोषणाओं और दस्तावेज़ों में उलझा दिया जाता है, ताकि सत्ता से सीधा टकराव टलता रहे। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर कमलेश तेकाम ने ये भी स्पष्ट रूप से कहा है की अब आदिवासी और दलित समाज यह समझ चुका है कि चेहरे बदलने से नीतियाँ नहीं बदलतीं,डिक्लेरेशन बदलने से ज़मीन वापस नहीं मिलती,और मंथन के नाम पर चलने वाले स्वांग से सामाजिक न्याय नहीं आता। भोपाल डिक्लेरेशन–2 अगर सत्ता, सिस्टम और कॉर्पोरेट गठजोड़ से टकराने की हिम्मत नहीं रखता, तो उसे सामाजिक आंदोलन नहीं, एक और राजनीतिक नौटंकी ही कहा जाएगा।

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