पाटनगढ़ में गोंड चित्रकला की गूँज; नेशनल डिजाइन सेंटर की कार्यशाला का अधिकारियों ने किया अवलोकन

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संपादक प्रकाश मिश्रा
जनपथ टुडे डिंडौरी : 24 फरवरी, 2026 — गोंडी कला की जन्मस्थली के रूप में विख्यात पाटनगढ़ इन दिनों रंगों और रचनात्मकता से सराबोर है। यहां नेशनल डिजाइन सेंटर द्वारा आयोजित ‘गोंड आर्ट वर्कशॉप’ में जनजातीय कलाकारों की प्रतिभा को निखारने का कार्य किया जा रहा है। यह कार्यशाला जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से संचालित हो रही है।

विख्यात डिजाइनर जागेश्वर अहिरवार के नेतृत्व में कार्यशाला 
कार्यशाला का नेतृत्व राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान के पूर्व छात्र एवं विख्यात डिजाइनर जागेश्वर अहिरवार कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में स्थानीय कलाकार अपनी पारंपरिक गोंड चित्रकला को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप ढालने की बारीकियां सीख रहे हैं।
हाल ही में आयोजित निरीक्षण के दौरान एसडीएम बजाग  रामबाबू देवांगन, हस्तशिल्प सेवा केंद्र भोपाल के सहायक निदेशक  नर सिंह सैनी एवं पाटनगढ़ के सरपंच  चंद्रविजय कुशराम ने कार्यशाला स्थल पहुंचकर कलाकारों के कार्यों का अवलोकन किया।

अधिकारियों ने की कलाकारों द्वारा तैयार की जा रही कलाकृतियों की सराहना

अधिकारियों ने कलाकारों द्वारा तैयार की जा रही कलाकृतियों की सराहना करते हुए कहा कि गोंड कला की विशिष्ट शैली और सूक्ष्म रेखांकन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान दिलाने की अपार संभावनाएं हैं।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कलाकारों से संवाद कर उन्हें नवाचार, गुणवत्ता संवर्धन और विपणन के नए आयामों पर मार्गदर्शन दिया। इस पहल से न केवल पारंपरिक कला को संरक्षण मिल रहा है, बल्कि स्थानीय कलाकारों के लिए आत्मनिर्भरता और रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

पाटनगढ़ में आयोजित यह कार्यशाला गोंड कला की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उसे वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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