गरीबों की झुग्गियों को छिपाने खड़ी की जा रही है दीवार

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डिंडोरी – जनपथ टुडे, 23.02.2020

अमेरिका के राष्ट्रपति के गुजरात दौरे की तैयारियों में जुटी सरकार कई स्तर पर प्रयास कर रही है और ट्रंप साहब की अगवानी के चाकचौबंद इंतजामों को लेकर कई तरह की चर्चाएं है और ट्रंप को सरकार कितना बजन दे रही है इसके कई एैसे नमूने सरकार की सोच और इंतजाम से जरूर दिख रहे है जिससे देश का गरीब आदमी जरूर भौचक है इसके अलावा जो भी इन बातों को देख सुन रहा है हैरान रह जाता है।

देश मेंगरीबी हटाने के तमाम सरकारी दावे तो झूठे निकले और अब इसे मिटाने की जगह गरीबी छिपाने की कवायद के लिए यदि यह सरकार दोषी है, तो जरा उन पर भी विचार कीजिये जो इससे पहले सत्ता पर मौज करते रहे थे। ये प्रमाण उन लोगो के साथ धोखा भी है जिन्हें वोट बैंक के लालच में यहाँ- वहां बसा दिया जाता है, हर चुनाव् में लालच व डराकर, धमका कर उनके वोट हासिल कर लिए जाते हैं |
वैसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प अहमदाबाद ले जाने में कहीं कुछ ग़लत नहीं है। पहले भी भारत की सरकारें प्रमुख विदेशी मेहमानों को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम में ले जाती रही हैं। अंतर इतना है की इस बार अहमदाबाद की ‘भव्यता’ और ‘रीवर फ्रंट’ की शान दिखाने के लिए, एक नई कवायद हो रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति की शोभा-यात्रा में इस बात का विशेष ध्यान रखा जायेगा कि देश की ग़रीबी पर दुनिया के सबसे धनी देश के राष्ट्रपति की नज़र न पड़ जाये। विरोधाभास देखिये एक ओर दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियम का उद्घाटन कराया जा रहा है, वहीं हवाई अड्डे से स्वागत-समारोह के स्थान तक जाने की राह में दिखाई देने वाली एक छोटी-सी झोपड़पट्टी के सामने एक दीवार बनाकर गरीबी को छिपाने की कोशिश हो रही है।
इन दीवारों से गरीबी दिखे भले न पर हट तो नहीं सकती, देश में गरीबी हटाने के लिए तो सरकारों की आंखो के सामने जो दीवारें खड़ी हो जाती है उन्हें भी गिराने के बड़ी जरूरत है।

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