
वन विभाग की कार्रवाई से आदिवासियों में आक्रोश
जनपथ टुडे डिंडोरी 07 जुलाई।
ग्राम बरेण्डा विकासखंड करंजिया जिला डिण्डौरी में वन विभाग की कार्रवाई ने आदिवासी समुदाय के लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। 23 जून 2025 को वन विभाग ने भारी पुलिस फोर्स के साथ जिले का वन विभाग ग्राम में जेसीबी वाहनों के साथ पहुंचकर 30 वर्षों से बने घर मकान और झोपड़ियों को तोड़ दिया।
वन अधिकार मान्यता कानून का उल्लंघन
वन अधिकार मान्यता कानून की प्रस्तावना में ही लिखा है कि जनजातियों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को पूरा करने के लिए यह कानून लाया गया है। लेकिन वन विभाग ने इस कानून की धज्जियां उड़ाते हुए आदिवासियों के घरों और झोपड़ियों को तोड़ दिया।
आदिवासियों की शिकायतें
आदिवासी समुदाय के लोगों ने वन विभाग के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई हैं। उनका आरोप है कि वन विभाग ने उनके खेतों को तोड़ दिया और उनके घरों को बर्बाद कर दिया। आदिवासियों का कहना है कि वे वन भूमि पर खेती करते आ रहे हैं और वन विभाग की कार्रवाई से उनके जीवन पर संकट आ गया है।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की मांग
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने वन विभाग की कार्रवाई की निंदा करते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। पार्टी का कहना है कि वन विभाग की कार्रवाई आदिवासियों के अधिकारों का हनन है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
समुदाय की मांगें
आदिवासी समुदाय ने वन विभाग से कई मांगें की हैं। इनमें शामिल हैं:
1. पीड़ित किसानों के भू अधिकार हेतु दावा पत्र ग्रामसभा/वन अधिकार समिति के माध्यम से जमा किए जाएं और उपखंड स्तरीय समिति व जिला स्तरीय वन अधिकार समिति दस्तावेजों के परीक्षण कर भू अधिकार प्रदान करे।
2. ग्राम बरेण्डा में वन अधिकार मान्यता कानून के तहत सामुदायिक वन संसाधन का अधिकार CFRR भी वन अधिकार समिति ग्रामसभा बरेण्डा को दिया जाए।
3. समस्त पीड़ित किसानों को तोड़े गए घर मकान गौशाला का उचित मूल्यांकन कर मुआवजा दिया जाए।
4. शासन द्वारा किसानों को दी जाने वाली समस्त योजनाओं का लाभ व सम्मान निधि किसानों को मुहैया कराया जाए।
5. समस्त पीड़ित हितग्राहियों को उनके तोड़े गए आश्रय स्थलों पर बारिश में बचाव की सामग्री व आवास निर्माण कराया जाए।