
बैगा जनजाति को आज भी मूलभूत सुविधाओं की दरकार
सफेद हाथी साबित हुई अब तक शासन की योजनाएं
जनपथ टुडे, डिंडोरी, 4 सितम्बर 2020, अमरपुर, डिण्डौरी शासन द्वारा बैगा जन जातियों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन इन जन कल्याणकारी योजनाओं से बैगाओं का विकास नहीं हो पा रहा हैं, बैगा आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। बैगा जनजाति आज भी अपनी आजीविकाओं चलाने में सक्षम हो सकी है। रोजी रोटी के लिए ये अब तक हमेषा संघर्षरत रहते हैं, जबकि उनकी जरूरतें बहुत सीमित है। जब सरकार इनके लिए पानी की तरह पैसा बहा रही हैं तो फिर राष्ट्रीय मानव बैगाओं को क्यों वंचित किया जा रहा है उनके मूल भूत अधिकारी से? जनपद पंचायत अमरपुर क्षेत्रातंर्गत ग्राम पंचायत परसेल के पोषक ग्राम पिंडरुखी बैगा टोला जहाॅ के निवासी आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं,जिन्हें न सड़क की सुविधा मिल पा रही हैं, न ही पेयजल की व्यवस्था हैं। जबकि शासन द्वारा विशेष बैगा जनजाति के लिए अलग से बैगा प्राधिकरण की स्थापना भी की गई हैं ताकि बैगा जन जाति को सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध हो सके। किन्तु जमीनी हकीकत बहुत अलग है दयनीय है और इस हाल में जीवन यापन करने मजबूर हैं बैगाजन।
ग्राम पंचायत परसेल द्वारा सीमेंट कांक्रीट सड़क निर्माण किया गया हैं, वह भी अधूरा पड़ा हुआ हैं। निर्माण स्थल पर किसी प्रकार का सूचना पटल भी स्थापित नहीं हैं। जिससे मद, लागत एवं सड़क की लम्बाई की जानकारी भी मिल सके। पेय जल हेतु हेण्ड पम्प हैं परन्तु ग्रामीणों के अनुसार पानी नहीं निकल रहा हैं। ग्राम में नल जल योजना भी संचालित हैं किन्तु बैगा टोला में इससे भी पानी नहीं पहुॅचता हैं। जबकि बैगाओं के कल्याण की योजनों की समीक्षा जिला मुख्यालय में बैठकर नेता और अधिकारी करते हैं। राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी इनके विकास की समीक्षा कागजो पर तो होती ही रहती हैं फिर भी राष्ट्रीय मानव बैगा छोटी छोटी समस्याओं से अब तक जूझ रहा हैं
, बैगा आज भी बदहाली का जीवन जीने पर मजबूर हैं। इनकी बदहाली का जिम्मेदार आखिर कौन हैं? इन बैगाओं की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हैं, अनेक तरह की योजनाएं भी इनके लिए कारगर साबित नहीं हो पाई हैं। बाकी की तमाम समस्यायों की बात न भी की जावे तब भी जिले में बसने वाली बैगा जनजाति के लिए आज भी अपनी आजीविका आसानी से चला पाना भी कठिन है तब सवाल यह उठता है कि आखिर वर्षों से चलने वाली योजनाएं जो इस जनजाति के उत्थान के लिए थी उनका क्या हुआ और क्या हुआ उस भारी भरकम शासकीय आबंटित राशि का जिसका लाभ आज तक बैगाओ को नहीं मिल पाया।