
गबन के आरोपी पंचायत सचिवों के हवाले ग्राम पंचायतें
डिन्डोरी – जनपथ टुडे, 10.02.2020
करंजिया – बरबसपुर के पूर्व सचिवों के वित्तीय अधिकार बहाल
गबन के आरोपी सचिव को दो पंचायतो का कमान
डिंडौरी – केन्द्र एवं राज्य सरकारो के द्वारा पिछडे एवं ग्रामीण क्षेत्रो के आम लोगो के जीवन स्तर सुधारने तथा उन्हे मूलभूत सुविधाए मुहैया कराने के लिए पंचवर्षीय योजना लागू कर समावेषी विकास हेतु पंचायतो को वित्तीय राशी प्रदान की जाती है। सरकार के समावेशी विकास की मंशा पर पानी फेरा जा रहा है। आगनबाडी,प्रायमरी शाला ,सीसी रोड सहित तमाम मूलभत कार्यो की राशी विकास कार्यो में खर्च न होकर क्रियान्वयन ऐंजेंसियो के जिम्मेदारो की जेब में जा रही है।
जिसकेअनेक उदाहरण सामने है, करंजिया ज.प. की कई ग्राम पंचायतो में सरकारी धन की जमकर बंदरबाॅट कर कागजी खानापूर्ती कर लाखो रू. स्वंय के हित में नियमो को ताक में रखकर बंदरबाट किया गया और मामले की शिकायत पर जांच और कार्यवाही की गई। जब बात जिला पंचायत के कारनामे की होती है तो यहाॅ वर्षो से पदस्थ एक परियोजना अधिकारी की प्रसंगिकता सामने आती है। अति.सीईओ के द्वारा पंचायत की राषि गबन करने वाले पंचायत सचिवो को नियमो को ताक में रखकर बहाल किया गया था,पंचायत शाखा में पदस्थ कथित परियोजना अधिकारी के द्वारा ग्राम पंचायत करंजिया के पूर्व सचिव प्रकाश बाॅधव एवं बरबसपुर में पदस्थ रहै ओमप्रकाष बनाफर जिनके विरूध्द प्रशासन ने एफआईआर दर्ज कराई थी तथा मामला सिविल न्यायालय में विचाराधीन है उन्हे रियायत देते हुए बहाल किया जाना एक नई भृष्टाचार की कहानी को जन्म देता है। फिलहाल पंचायत प्रकोष्ठ देख रहे परियोजना अधिकारी के विरूध्द अर्थिक अपराध अन्वेषण विभाग में पैसा वसूलने संबधी आरापो की जाॅच लंबित है। बहाल करने में अति. कार्यक्रम अधिकारी एवं परियोजना अधिकारी की भूमिका की जाॅच अतिशीघ्र कराये जाने से मामले का खुलासा हो सकता है कि पंचायतो में हो रहे बदंरबाट में जिला पंचायत के तथाकथित अधिकारियो की कितनी भागीदारी है। ये अधिकारी जिला पंचायत से सैकडो फाईल गायब करने में महारथ रखते है,अगर समय रहते जाॅच नही होती तो संभवतः ये फाईल भी गायब हो सकती है।
3898438 रूपए गबन के आरोपी को खजाने की चाबी
ग्राम पंचायत करंजिया में पूर्व में पदस्थ रहे सचिव प्रकाश बाॅधव एवं सरपंच सुशीला बाई के विरूध्द पंच परमेष्वर योजना के अंतर्गत 1589132 रूपए, बीआरजीएफ योजनांतर्गत 8 लाख रूपए, आईएपी अंतर्गत 667306 रूपए एवं मनरेगा एवं आईएपी मद से 242000 रूपए, इस तरह से कुल 3898438 रूपए गबन किया गया था। जिस पर तत्कालीन मुख्यकार्यपालन अधिकारी ए.एस. कुशराम के द्वारा करंजिया थाने में मामला दर्ज कराया गया था। उक्त घोटाले को लेकर मुख्यकार्यपालन अधिकारी करंजिया के द्वारा थाने में पूर्व सरपंच श्रीमति सुशीला बाई मरकाम व सचिव प्रकाश बांधव के विरूद्ध प्रकरण दर्ज कराया गया था। करंजिया थाने में दिनांक 20 जून 2015 को भा.द.स. की धारा 420, 409, 34 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
फर्जी हस्ताक्षर से राशी गबन करने वाले सचिव को 2 पंचायतो का प्रभार
करंजिया जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत बरबसपुर में पूर्व में पदस्थ रहै सचिव ओमप्रकाश बनाफर के विरूध्द प्रशासन के द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई थी। बीआरजीएफ योजना के तहत आंगनबाडी भवन,एवं रंग मंच,निर्माण के लिए 9 लाख रू. आॅवटित किया गया था किन्तु सचिव/सरपंच ने 7 लाख रू. एवं पंच परमेश्वर योजना के तहत 4 लाख रू.अनाधिकृत रूप से गबन किया था। पूर्व सरपंच ने सचिव ओमप्रकाश बनाफर के विरूध्द फर्जी सील /हस्ताक्षर कर राशी गबन करने का आरोप लगाया था । मामले में जनपद पंचायत सीईओ के द्वारा जाॅच कर दोषियो के विरूध्द करंजिया थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी, किन्तु वर्ष 2017 में जिला पंचायत के अधिकारियो ने गबन के आरोपी सचिव के वित्तीय अधिकार बहाल करते हुए ग्राम पंचायत खन्नात एवं रैतवार का प्रभार सौंप दिया । इस तरह से जिला प्रशासन के द्वारा गबन करने वाले भृष्टाचारियो का हौसला बढाया जा रहा है।
कार्रवाई के नाम पर गोल माल करते अधिकारी
फिलहाल जिला पंचायत में पदस्थ अधिकारी समीक्षा बैठको में अनुपस्थित सचिवो को बिना देर किए तत्काल निलंबित कर रहै है जिससे प्रतीत होता है कि सीईओ एम एल वर्मा सख्त है और भृष्टाचार करने वालो के विरूध्द कार्रवाई करेंगे किन्तु उक्त मामला उजागर होने के महीनो बाद भी जिला पंचायत सीईओ के द्वारा कार्रवाई नही की जा रही है, जिससे इस तरह के भ्रष्ट दूसरे सचिव भी जिला पंचायत के कारनामों से उत्साहित हो कर अपने मसलों को निपटाने चक्कर काटते देखे जा सकते है। जिला पंचायत की इस तरह की लचर कार्यप्रणाली से भ्रष्टों के हौसले बढ़ते जा रहे है।