जिला मुख्यालय में गरीब श्रमिकों का हो रहा शोषण

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जन-पथ टुडे, डिंडोरी, 16 नवंबर 2022,
डिंडोरी जिला वैसे तो पहले ही अपने प्रशासनिक लापरवाहियों के लिए कुख्यात रहा है, जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों के निकम्मेपन के कारण भ्रष्टाचार और शोषण का चहुंओर बोलबाला है। विशेषकर श्रम विभाग की अकर्मण्यता लापरवाहीया तथा अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीनता से डिंडोरी जिला संभवत पूरे प्रदेश में शिखर पर होगा। इस विभाग की उदासीनता के कारण मजदूरों और श्रमिकों का खुलकर बेखौफ शोषण हो रहा है और यह आदिवासी बाहुल्य जिला श्रमिकों के शोषकों का प्रिय स्थान बना हुआ है। जिले के दूरस्थ क्षेत्रों की बात तो छोड़िए जिला मुख्यालय में संचालित विभिन्न व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमिकों में इसका प्रमाण आसानी से देखा जा सकता है। आवासीय भवनों में व्यवसाय कर रहे व्यापारीगण जहां एक ओर पक्की रसीदें ना देकर टैक्स की चोरी करके सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाते हैं। वही अपने प्रतिष्ठान में कार्य कर रहे श्रमिकों को भी नियमानुसार उनके श्रम का मूल्य नहीं देते। इन व्यवसायियों के पास कार्य कर रहे श्रमिकों का कोई लेखा-जोखा नहीं है, जैसे मजदूरी किस दर पर दी जा रही है श्रमिक किस स्तर का है उससे कितने घंटे से काम लिया जा रहा है। श्रमिक बालिग अथवा नाबालिग है और सबसे महत्वपूर्ण बात श्रमिक का श्रम विभाग में पंजीयन है अथवा नहीं।प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य शासन द्वारा निर्धारित मजदूरी अकुशल, अर्द्धकुशल, कुशल, श्रमिको की न्यूनतम मजदूरी 216.66 पैसा दैनिक है। जो कि जिले में व्यावसायिक फर्मो द्वारा नहीं दी जाती।

साथ ही साथ पुलिस थाना डिंडोरी को व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में कार्य श्रमिकों की जानकारी व्यापारियों के द्वारा उपलब्ध कराई गई है या नहीं विशेषकर त्यौहार के अवसरों पर अतिरिक्त कार्य लेने के बदले क्या उन्हें अतिरिक्त मजदूरी भी दी जाती है अथवा नहीं। इस सबकी जानकारी लेने वाला कोई नहीं है और श्रम विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कुंभकरण नींद में सो रहे हैं। इतनी भयंकर विपरीत परिस्थिति और शोषण के बावजूद भी श्रमिक नगर कार्य कर रहा है तो उसकी वजह बिल्कुल साफ है रोजगार की कमी के चलते श्रमिक अपना जीवन यापन करने के लिए जिंदा रहने के लिए अपने नियोक्ता की तमाम वैध अवैध शर्तों को मानकर काम करने को मजबूर है। उसकी इसी मजबूरी का फायदा नगर मुख्यालय के व्यापारी जमकर उठा रहे आवासीय भवनों का व्यवसायिक प्रयोजन से उपयोग कर रहे इन शोषकों को कानून और संविधान का कोई भय नहीं है जनहित में कलेक्टर महोदय से इस गंभीर समस्याएं पर ध्यान दिए जाने का आग्रह श्रमिको के हित में काम करने वाले संगठनों ने मांग की है। उनकी मांग है जिले के संबंधित विभाग के जिम्मेदारों को उनके कर्तव्य का बोध कराकर आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित करेंगे और श्रमिकों के साथ हो रहे इस अत्याचार से श्रृमिकों को मुक्ति दिलाएंगे साथ ही साथ शोषण पर भी विराम लगाएंगे और आवश्यकतानुसार सभी आवश्यक कानूनी कार्यवाही कराएंगे। श्रमिकों को उनके श्रम का वास्तविक मूल मिलने लगेगा तो श्रमिकों के जिले से पलायन की समस्या पर भी काफी हद तक गिरावट आएगी।

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