
पेसा मोबिलाइजरों की सेवा समाप्ति पर भड़का भारतीय मजदूर संघ, बहाली के लिए अल्टीमेटम
✍️ उपसंपादक मोहम्मद साहिब
जनपथ टुडे डिंडौरी 22 मई:— मध्यप्रदेश में कार्यरत पेसा (PESA) मोबिलाइजरों को सेवा से मुक्त किए जाने के आदेश के बाद भारतीय मजदूर संघ ने मोर्चा खोल दिया है। भारतीय मजदूर संघ, जिला डिंडौरी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन सौंपकर इस आदेश को तत्काल निरस्त करने और पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं यथावत बहाल करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो संघ प्रदेशव्यापी बड़ा आंदोलन शुरू करेगा।
क्या है पूरा मामला?
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2021 से प्रदेश के 20 जिलों के 89 आदिवासी ब्लॉकों की ग्राम पंचायतों में राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत पेसा मोबिलाइजर अपनी सेवाएं दे रहे थे। हालांकि, 18 मई 2026 को पंचायत संचालनालय द्वारा जारी आदेश में यह तर्क दिया गया कि आरजीएसए योजना की कार्यविधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है और नई नीति अभी प्रक्रियाधीन है। इसी आधार पर पेसा मोबिलाइजरों को तत्काल प्रभाव से सेवामुक्त कर दिया गया है।

मोबिलाइजरों की मुख्य शिकायतें और मांगें
भारतीय मजदूर संघ ने सरकार के इस कदम को अनुचित बताते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित किया है:
आजीविका का संकट: सेवामुक्ति के आदेश से सैकड़ों पेसा मोबिलाइजरों के सामने आजीविका और मानसिक संकट उत्पन्न हो गया है।
लंबित वेतन: ज्ञापन में एक गंभीर मुद्दा यह भी उठाया गया है कि इन मोबिलाइजरों को पिछले 8 महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है।
महत्वपूर्ण योगदान: मोबिलाइजरों ने आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने, पेसा एक्ट के प्रति जागरूकता लाने, वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन और शासन की विभिन्न योजनाओं (जैसे लाडली बहना, आयुष्मान कार्ड, समग्र आईडी, संबल, राशन, पेंशन आदि) को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है। इन्हीं प्रयासों के चलते पेसा कार्यों में मध्य प्रदेश को देश में दूसरा स्थान मिला है।
सरकार को दी चेतावनी
भारतीय मजदूर संघ ने स्पष्ट किया है कि पेसा मोबिलाइजरों ने पूरी निष्ठा के साथ सरकार के संकल्प पत्रों को धरातल पर उतारने में सहयोग किया है। संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सेवा समाप्ति के आदेश को तुरंत वापस लिया जाए। संघ ने अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि सात दिनों के भीतर उनकी सेवाएं बहाल नहीं की जाती हैं, तो इसके बाद होने वाले किसी भी प्रदेशव्यापी आंदोलन और उसकी समस्त जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी।

