डिंडोरी: ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत लगे प्याऊ पड़े शो-पीस, भीषण गर्मी में पानी को तरस रहे राहगीर

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उपसंपादक मोहम्मद साहिब

जनपद टुडे डिंडोरी 2 मई:— प्रदेश व्यापी जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण और जन-सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जिला मुख्यालय डिंडोरी में जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। भीषण गर्मी और तपती धूप के बीच राहगीरों को ठंडा पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शहर के मुख्य चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर जो सार्वजनिक प्याऊ के तम्बू लगाए गए हैं, वे देखरेख के अभाव में सफेद हाथी के तरह साबित हो रहे हैं।

तंबू हैं पर घड़े गायब, कहीं घड़े हैं तो पानी नहीं

जिला मुख्यालय के विभिन्न हिस्सों में लगाए गए इन सार्वजनिक प्याऊ की स्थिति दयनीय है। अधिकांश स्थानों पर प्याऊ के लिए तंबू तो तन गए हैं, लेकिन उनके नीचे रखे जाने वाले घड़े नदारद हैं। जिन इक्का-दुक्का स्थानों पर घड़े नजर आते हैं, वो भी खाली पड़े हुए हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते इन प्याऊ में नियमित पानी भरने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे ‘जल सेवा’ का यह अभियान महज एक औपचारिकता बनकर रह गया है।

 

राहगीर परेशान, बाजार से पानी खरीदने को मजबूर

डिंडोरी जिला मुख्यालय में रोजाना आसपास के ग्रामीण अंचलों से हजारों लोग अपने निजी और शासकीय कार्यों के लिए आते हैं। जहां 40 डिग्री से ऊपर पहुँच रहे तापमान के बीच बस स्टैंड, कलेक्ट्रेट मार्ग और मुख्य बाजार में पैदल चलने वाले राहगीरों को प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। सरकारी प्याऊ में पानी न होने के कारण गरीब ग्रामीणों और आम जनों को मजबूरन बाजार से ऊंचे दामों पर पानी की बोतलें बाजारों से खरीदनी पड़ती हैं। हैरानी की बात यह है कि जिला मुख्यालय की नाक के नीचे हो रही इस अव्यवस्था पर जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं। नगर परिषद डिंडोरी के अमले द्वारा नियमित मॉनिटरिंग न होने के कारण सरकार की एक कल्याणकारी योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती दिख रही है।

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