नीयत और नीति में अंतर: ईंधन बचत का संदेश देने निकले अफसर, वापसी में सरकारी वाहनों से लौटे

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संपादक प्रकाश मिश्रा

डिंडौरी। अमरपुर विकासखंड के सिधौली स्थित नवीन हायर सेकेंडरी विद्यालय भवन में शुक्रवार को मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान का शुभारंभ किया गया। शासन की मंशा के अनुरूप सरकारी संसाधनों के मितव्ययी उपयोग और ईंधन बचत का संदेश देने के उद्देश्य से कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के नेतृत्व में जिले के करीब तीन दर्जन अधिकारी-कर्मचारी एक बस में सवार होकर कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुए। अधिकारियों की सामूहिक यात्रा ने शुरुआत में सकारात्मक संदेश दिया और इसकी चर्चा भी हुई।

लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वापसी के समय तस्वीर बदल गई। जिला मुख्यालय लौटते समय बस में केवल एसडीएम रामबाबू देवांगन, सहायक आयुक्त राजेन्द्र जाटव, जनसंपर्क अधिकारी पुष्पराज सिंह और जिला प्रबंधक (एनआरएलएम) अर्पणा पांडे सहित कुछ अधिकारी-कर्मचारी ही नजर आए। वहीं कई वरिष्ठ अधिकारी अपने-अपने सरकारी वाहनों से वापस लौटे।

कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया, एसपी आशीष खरे, वन मंडल अधिकारी अशोक सोलंकी, जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी, उपसंचालक कृषि संजय दोसी तथा लोक निर्माण और विद्युत वितरण विभाग के कार्यपालन यंत्रियों सहित कई अधिकारियों ने वापसी के लिए अलग-अलग सरकारी वाहनों का इस्तेमाल किया।

ईंधन बचत पर उठे सवाल

पूरे घटनाक्रम ने सरकारी संसाधनों के मितव्ययी उपयोग को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अधिकारी सामूहिक रूप से बस से गए, लेकिन वापसी में कई अधिकारी अपने सरकारी वाहनों से लौटे, तो ऐसे में वास्तविक ईंधन बचत कितनी हुई, यह सवाल स्वाभाविक है।

सुबह भी अधिकारियों के सरकारी वाहन उनके साथ मौजूद रहे। ऐसे में सामूहिक यात्रा की पहल का उद्देश्य केवल कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने तक सीमित नजर आया। यदि वापसी भी उसी बस से की जाती, तो ईंधन बचत और सरकारी संसाधनों के मितव्ययी उपयोग का संदेश कहीं अधिक प्रभावी होता।

सरकार की ओर से लगातार सरकारी खर्च में मितव्ययिता और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया जाता है। ऐसे में अधिकारियों द्वारा ही यदि इस व्यवस्था का पूरी तरह पालन नहीं किया जाता, तो अभियान की मंशा और उसके क्रियान्वयन के बीच अंतर साफ दिखाई देता है।

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