
सम्मान के दिन अधिकारों की लड़ाई, अतिथि शिक्षकों के भविष्य पर बड़ा सवाल

✍️ मोहम्मद साहिबेआलम, उपसंपादक
जनपथ टुडे डिंडोरी 5 सितंबर:- शिक्षक दिवस उस व्यक्तित्व के सम्मान का दिन है, जो समाज और राष्ट्र के भविष्य को आकार देने का काम करता है। लेकिन डिंडोरी में इसी दिन अतिथि शिक्षकों का कलेक्ट्रेट परिसर में जमीन पर बैठकर अपनी मांगों के लिए आवाज उठाना व्यवस्था के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा करता है—जो शिक्षक बच्चों के भविष्य की नींव मजबूत कर रहे हैं, उनके अपने भविष्य की नींव आखिर कब मजबूत होगी?
क्या है मांगे
जिला अध्यक्ष इमरान मलिक ने बताया आजाद स्कूल अतिथि शिक्षक संघ के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों की मांगें कोई अचानक उठी हुई मांग नहीं हैं। नियमितीकरण, मानदेय में वृद्धि और सीएल आदेश जैसी मांगों को लेकर अतिथि शिक्षक लंबे समय से शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते रहे हैं। 2 सितंबर 2023 की घोषणाओं और 5 अगस्त को दिए गए आश्वासनों के बावजूद यदि आज भी शिक्षक सड़कों पर बैठने को मजबूर हैं, तो यह केवल एक विभागीय विषय नहीं, बल्कि शासन के वादों और उनके क्रियान्वयन के बीच की दूरी का प्रश्न है।
अतिथि शिक्षक वर्षों से शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। सीमित संसाधनों और अल्प मानदेय के बावजूद वे विद्यालयों में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में उनके सामने रोजगार की अनिश्चितता, आर्थिक असुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता बनी रहना स्वाभाविक रूप से निराशा को जन्म देता है। महंगाई के वर्तमान दौर में कम मानदेय पर परिवार की जिम्मेदारियां निभाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
यहां एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भी है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में ज्ञापन देना, अपनी मांग रखना और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना नागरिकों का अधिकार है। लेकिन जब किसी वर्ग को बार-बार आश्वासन मिलने के बाद भी अपनी मांगों के लिए आंदोलन करना पड़े, तो यह व्यवस्था में विश्वास के कमजोर होने का संकेत माना जाना चाहिए। प्रशासन और आंदोलनरत शिक्षकों के बीच संवाद का रास्ता खुला रहना आवश्यक है। केवल पत्राचार या आश्वासन से आगे बढ़कर स्पष्ट समयसीमा और ठोस निर्णय ही इस अविश्वास को दूर कर सकते हैं।
शिक्षक दिवस पर शिक्षकों का सम्मान केवल मंचों पर माल्यार्पण और भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शिक्षक का वास्तविक सम्मान तभी होगा, जब उसे अपने काम, मेहनत और भविष्य को लेकर सम्मानजनक सुरक्षा का भरोसा मिले।

डिंडोरी की घटना शासन और प्रशासन के लिए एक अवसर भी है और चेतावनी भी। अवसर इसलिए कि बातचीत के माध्यम से वर्षों से चली आ रही समस्याओं का समाधान खोजा जा सकता है और चेतावनी इसलिए कि लगातार टलते समाधान किसी भी वर्ग में असंतोष को गहरा कर सकते हैं।



