
शोध की नई राह पर शिक्षक: चंद्रविजय महाविद्यालय में सात दिवसीय एफडीपी का शुभारंभ,

पीएम उषा कंपोनेंट-3 के तहत रिसर्च मेथडोलॉजी पर होगा प्रशिक्षण, 45 प्राध्यापकों ने कराया पंजीयन
प्रकाश मिश्रा, संपादक
जनपथ टुडे 31 अगस्त 2026 – डिंडौरी शासकीय चंद्रविजय महाविद्यालय डिंडौरी में प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम उषा) कंपोनेंट-3 के अंतर्गत सात दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (एफडीपी) का शुभारंभ किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अमर सिंह बुद्धे के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में रिसर्च मेथडोलॉजी (शोध प्रविधि) विषय पर शिक्षकों एवं प्राध्यापकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पीएम उषा के सॉफ्ट कंपोनेंट के अंतर्गत विभिन्न कौशल प्रशिक्षण, एड-ऑन प्रशिक्षण, सेमिनार तथा शिक्षक एवं स्टाफ के लिए संकाय विकास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में तृतीय चरण के कार्यक्रमों के अंतर्गत महाविद्यालय में सात दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम का संचालन शेडमैप एवं उद्यमिता विकास केन्द्र डिंडौरी के तत्वावधान में समन्वयक एस.के. शर्मा के सहयोग से किया जा रहा है। पीएम उषा परियोजना के नोडल अधिकारी डॉ. अमित कुमार बेलिया ने रिसर्च मेथडोलॉजी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम के रिसोर्स पर्सन डॉ. रत्नेश तिवारी का उपस्थित शिक्षक स्टाफ से परिचय कराया।
पीएचडी शोधार्थियों और वरिष्ठ प्राध्यापकों के लिए उपयोगी होगा प्रशिक्षण
डॉ. अमित कुमार बेलिया ने कहा कि वर्तमान में पीएचडी कर रहे साथियों के लिए शोध प्रविधि पर आधारित यह कार्यक्रम मील का पत्थर साबित होगा। वहीं वरिष्ठ प्राध्यापकों को शोध मार्गदर्शक के रूप में अपनी भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने में भी यह प्रशिक्षण महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से कार्यक्रम में शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने की अपील की।
महाविद्यालय में इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए तीन अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। इनमें ब्यूटी एंड वेलनेस, मार्केटिंग एंड सेल्स प्रमोशन तथा कंप्यूटर हार्डवेयर रिपेयरिंग एवं सीसीटीवी इंस्टॉलेशन विषयों पर कार्यशालाएं शामिल हैं। शेडमैप डिंडौरी द्वारा संचालित इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विभिन्न कक्षाओं के लगभग 40-40 विद्यार्थी प्रतिदिन प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
वहीं रिसर्च मेथडोलॉजी विषय पर आयोजित सात दिवसीय एफडीपी कार्यक्रम में करीब 45 प्रोफेसर्स एवं शिक्षकों ने पंजीयन कराया है।
दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती पूजन के साथ हुई शुरुआत
शोध प्रविधि कार्यक्रम की विद्या प्रभारी डॉ. श्रीमती पार्वती कुशराम ने अतिथियों को दीप प्रज्ज्वलन के लिए आमंत्रित किया। मां सरस्वती के पूजन एवं स्वागत कार्यक्रम के पश्चात उन्होंने सात दिवसीय एफडीपी की रूपरेखा, प्रस्तावित पाठ्यक्रम एवं समय-सारिणी से उपस्थित शिक्षक स्टाफ को अवगत कराया।
शोध से खुलती हैं विकास और नवाचार की नई संभावनाएं
कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता डॉ. रत्नेश तिवारी रहे, जो सी.वी. रमन विश्वविद्यालय में भौतिक शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष एवं अनुसंधान प्रभाग के समन्वयक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने रिसर्च मेथडोलॉजी के विभिन्न आधारभूत सिद्धांतों, शोध की प्रस्तावना, उसकी उपयोगिता एवं भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से व्याख्यान दिया।
उन्होंने अपने संबोधन में शोध की उपयोगिता को उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए मोरिंगा, मुनगा अथवा सहजन जैसे औषधीय पौधों पर किए जा रहे शोध कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि निरंतर शोध एवं पुनः शोध के माध्यम से विभिन्न वनस्पतियों और पदार्थों की उपयोगिता को बेहतर ढंग से समझा जा रहा है।
हल्दी के औषधीय गुणों एवं उसके विभिन्न उपयोगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अनुसंधान के माध्यम से विज्ञान, चिकित्सा, कृषि और समाज के अनेक क्षेत्रों में नई संभावनाओं को जन्म दिया जा सकता है। शोध की प्रवृत्ति को बढ़ावा देकर देश और समाज को वैज्ञानिक एवं अनुसंधान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
शिक्षकों में जगी अनुसंधान के प्रति विशेष रुचि
डॉ. रत्नेश तिवारी के व्याख्यान से उपस्थित शिक्षक एवं प्राध्यापक न केवल अकादमिक दृष्टि से लाभान्वित हुए, बल्कि उनमें अनुसंधान के प्रति विशेष रुचि भी विकसित हुई। सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से शोध कार्यों को नई दिशा देने तथा शिक्षकों को अनुसंधान की आधुनिक पद्धतियों से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी, प्राध्यापकगण एवं शिक्षक स्टाफ सहित डिंडौरी के विभिन्न महाविद्यालयों से उपस्थित प्राध्यापक शामिल रहे।




