
कर्तव्य में लापरवाही और गंभीर शिकायतों पर जेल अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस- भोजन व्यवस्था में भेदभाव और भ्रष्टाचार के आरोपों से जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
प्रकाश मिश्रा, संपादक
जनपथ टुडे डिंडौरी 31 अगस्त 2026 डिंडौरी- जिला जेल की व्यवस्थाओं में कथित लापरवाही, सीएम हेल्पलाइन की गंभीर शिकायतों के निराकरण में उदासीनता तथा अधीनस्थ कर्मचारियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रखने के मामले में कलेक्टर कार्यालय ने जेल अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में जेल विभाग से जुड़ी गंभीर शिकायतों, कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से पैसे लेने तथा कैदियों के भोजन की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों को गंभीरता से लिया गया है।
जानकारी के अनुसार 31 अगस्त 2026 को आयोजित समय-सीमा बैठक में जेल अधीक्षक बिना पूर्व अनुमति के अनुपस्थित पाए गए। उनकी अनुपस्थिति के कारण जेल विभाग से संबंधित सीएम हेल्पलाइन शिकायतों एवं अन्य विभागीय कार्यों की समीक्षा नहीं हो सकी।
बार-बार निर्देश के बावजूद बैठक से अनुपस्थित रहने का आरोप
कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी नोटिस में उल्लेख किया गया है कि जेल अधीक्षक को पूर्व में प्रत्येक समय-सीमा बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद उनके द्वारा स्वयं बैठक में उपस्थित होने के बजाय अधीनस्थ कर्मचारियों को भेजा जाता रहा। संबंधित कर्मचारी भी कई अवसरों पर समय पर बैठक में उपस्थित नहीं होते थे और बार-बार स्मरण कराने के बाद ही उनकी उपस्थिति सुनिश्चित हो पाती थी।
सीएम हेल्पलाइन में पहुंचीं दो गंभीर शिकायतें
विगत माह सीएम हेल्पलाइन में जिला जेल से संबंधित दो गंभीर शिकायतें दर्ज हुई थीं।
पहली शिकायत आवेदिका गायत्री बनवासी, निवासी ग्राम पोस्ट सिमरिया, तहसील एवं जिला डिंडौरी द्वारा शिकायत क्रमांक 39774316 के माध्यम से दर्ज कराई गई थी।
शिकायत में कार्यवाहक प्रमुख प्रहरी जयलाल कोल पर सब्जी एवं दवाई मंगाने के बाद राशि का भुगतान नहीं करने तथा प्रताड़ित करने के आरोप लगाए गए थे। शिकायत के संबंध में आवेदिका द्वारा बाद में दिए गए लिखित कथन में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित कर्मचारी द्वारा 18 अगस्त 2026 को उन्हें 13 हजार रुपये नगद वापस किए गए।
वहीं दूसरी शिकायत आवेदक घनश्याम साहू, निवासी ग्राम बरगांव, तहसील शहपुरा, जिला डिंडौरी द्वारा सीएम हेल्पलाइन शिकायत क्रमांक 39243155 के माध्यम से दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राशि नहीं देने के कारण जेल में भोजन ठीक से नहीं दिया जा रहा है।
कर्मचारियों की निगरानी और भोजन की गुणवत्ता पर उठे सवाल
इन शिकायतों के आधार पर जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली, अधीनस्थ कर्मचारियों के पर्यवेक्षण तथा कैदियों को उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि परिस्थितियों से यह प्रतीत होता है कि जेल अधीक्षक द्वारा अधीनस्थ कर्मचारियों पर प्रभावी नियंत्रण एवं उनके कार्यों का सतत पर्यवेक्षण नहीं किया जा रहा था। साथ ही जेल मैन्युअल के अनुरूप कैदियों को उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
सात दिन में मांगा जवाब, अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
नोटिस में इसे पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बताते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के अंतर्गत कदाचार की श्रेणी में माना गया है।
जेल अधीक्षक को निर्देशित किया गया है कि वे स्पष्ट करें कि उनके विरुद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 16 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न प्रस्तावित की जाए।
उन्हें नोटिस प्राप्त होने के 07 दिवस के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं समय-सीमा बैठक में बिना अनुमति अनुपस्थित रहने के संबंध में 03 सितंबर 2026 तक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के लिए भी कहा गया है।
निर्धारित समयावधि में उत्तर प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में संबंधित अधिकारी के विरुद्ध एकपक्षीय कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी गई है, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।
गंभीर शिकायतों के बाद जारी नोटिस ने जिला जेल की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जेल अधीक्षक के जवाब और आगे होने वाली विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं।




