
जांच में खुली नगर परिषद अध्यक्ष सुनीता सारस और अधिकारियों की पोल, पर धरातल पर कार्रवाई शून्य!
✍️ मोहम्मद साहिबेआलम, उपसंपादक
जनपथ टुडे डिंडौरी 12 अक्टूबर:- मध्यप्रदेश के डिंडौरी में अमृत 2.0 योजना के क्रियान्वयन के नाम पर सामने आई गंभीर तकनीकी, वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों ने योजना के क्रियान्वयन, पर्यावरण संरक्षण और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की हैं। जिस योजना का उद्देश्य नगरवासियों को बेहतर सीवरेज व्यवस्था और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना था, उसी के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, नगर परिषद डिंडौरी की अध्यक्ष सुनीता सारस के निजी मकान के पीछे भूमि अर्जन के बिना पिचिंग कार्य कराए जाने का मामला सामने आया है। इसके अलावा, मामले में निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
इस मामले में मुख्य नगरपालिका अधिकारी अमित तिवारी, नगर परिषद के उपयंत्री शिवराज बघेल, मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी (MPUDC) के कार्यपालन यंत्री एवं उपयंत्री, जल संसाधन विभाग (WRD) के कार्यपालन यंत्री एस.के. शर्मा एवं उपयंत्री विहान शुक्ला, तहसीलदार रामप्रसाद मार्को, राजस्व निरीक्षक हेमंत सिंह उइके तथा हल्का पटवारी बलीराम भवेदी की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
तालाब में सीवर लाइन बिछाने से पर्यावरण पर संकट
मामले का सबसे चिंताजनक पहलू जलाशयों और तालाबों के भीतर से सीवर लाइन बिछाए जाने का है। आरोप है कि सीवरेज व्यवस्था के निर्माण के दौरान जल स्रोतों के संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की गई। यदि बिना समुचित उपचार के सीवर का पानी जल स्रोतों में पहुंचा है, तो इससे जल प्रदूषण, जलीय जीवों और मत्स्य पालन से जुड़ी आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
ऐसे में योजना के तकनीकी क्रियान्वयन, पर्यावरणीय प्रभाव और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी की निष्पक्ष जांच किया जाना आवश्यक है।
जांच रिपोर्ट में सख्त कार्रवाई की सिफारिश, फिर भी कार्रवाई पर सवाल
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच रिपोर्ट में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने, निलंबन, विभागीय जांच, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) से जांच तथा लोकायुक्त जांच और प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने जैसी कार्रवाई की सिफारिश किए जाने का उल्लेख है। इसके बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
रोहित कांसकार ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर की कार्रवाई की मांग
अमृत 2.0 योजना के नाम पर डिंडौरी नगर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वित्तीय एवं तकनीकी धांधली किए जाने का आरोप लगाते हुए रोहित कांसकार ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
रोहित कांसकार का कहना है कि जांच रिपोर्ट में नगर परिषद अध्यक्ष सुनीता सारस और जिम्मेदार अधिकारियों पर गंभीर आरोप सामने आने तथा निलंबन, EOW जांच एवं FIR दर्ज करने की सिफारिश के बावजूद प्रशासन द्वारा अब तक कार्रवाई नहीं करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों को बचाने और मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे जनहित और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित हो और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े पहलुओं की अनदेखी न हो।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच रिपोर्ट में उठाए गए गंभीर बिंदुओं और कार्रवाई की सिफारिशों के बाद प्रशासन ने अब तक क्या कदम उठाए हैं? क्या संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है? क्या पर्यावरणीय नुकसान का आकलन कराया गया है? और क्या शिकायतकर्ता के आवेदन पर कोई कार्रवाई की जाएगी?
सार्वजनिक धन से संचालित योजनाओं में पारदर्शिता, तकनीकी मानकों का पालन और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में डिंडौरी की अमृत 2.0 योजना से जुड़े मामले में जांच रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि नागरिकों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।
अब देखना यह है कि कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन और जांच रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।
अधिकारियों से संपर्क का प्रयास, नहीं मिला जवाब
उक्त मामले में संबंधित अधिकारियों से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर के प्रकाशन तक किसी भी संबंधित अधिकारी की ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई। अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

