
राहुल भैया का दौरा बदलेगा सियासी समीकरण ❓
उपसंपादक मोहम्मद साहिब
जनपथ टुडे डिंडोरी 6 मई— मध्य प्रदेश की सियासत के दिग्गज स्तंभ और प्रदेश की राजनीति के कद्दावर नेता के रूप में जाने वाले अजय सिंह (राहुल भैया) आगामी 9 मई को मंडला—डिंडोरी आगमन हो रहा है। इस दौरे को लेकर कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है, और माना जा रहा है कि राहुल भैया का यह दौरा क्षेत्र की जमीनी राजनीति में नई जान फूंकने वाला साबित होगा।अजय सिंह राहुल भैया के इस दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं अनुमान लगाया जा रहा है कोई निश्चित रणनीति के साथ राहुल भैया दौरे पर आ रहें है।गौरतलब हैं कि आदिवासियों के बीच बहुत गहरी पैठ रखने वाले राहुल भैया अपने पिता अर्जुन सिंह जी जिन्हें आदिवासियों का मसीहा कहा जाता था उन की तरह ही बेहद लोकप्रिय है वो भी आदिवासी समाज के साथ गहरी संवेदना के साथ जुड़े हुए हैं और आदिवासी समाज भी उन पर पूरा भरोसा रखता है। राजनीतिक पंडितों के अनुसार आने वाले समय में कांग्रेस के अंदर बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता हैं। राहुल भैया इस दौरान वे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे जिससे सियासी समीकरण का बदलना निश्चित है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राहुल भैया 9 मई को प्रातः 11:30 बजे नैनपुर में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष दामोदर पटेल द्वारा उनका स्वागत किया जाएगा।
दोपहर 12:30 बजे बम्हननीबंजर में जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक मर्शकोले एवं पूर्व विधायक संजीव उइके की उपस्थिति में बैठक आयोजित होगी। इसके पश्चात दोपहर 01:30 बजे मंडला में भी कार्यकर्ताओं से मुलाकात का कार्यक्रम निर्धारित है।
आगे दोपहर 02:30 बजे घुघरी में विधायक नारायण पट्टा के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित होगा। वहीं दोपहर 03:30 बजे अमरपुर में विधायक एवं जिला अध्यक्ष ओमकार मरकाम के नेतृत्व में बैठक होगी।
अंत में शाम 04:30 बजे डिंडौरी पहुंचकर अजय सिंह राहुल भैया कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। वे केवल मुलाकात बस नहीं बल्कि संगठन की मजबूती पर भी चर्चा करेंगे, जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को भी सुनेंगे। उनके इस दौरे को आगामी चुनावों की तैयारियों और कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
सियासत का वो नाम, जिससे थर्राते हैं विरोधी
अजय सिंह सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति का एक बड़ा अध्याय हैं। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अर्जुन सिंह जी की विरासत को न केवल उन्होंने संभाला, बल्कि अपनी काबिलियत से राजनीति के शिखर तक पहुँचे।


