
राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना के विरोध में किसानों ने किया नेशनल हाईवे जाम, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन
भूमि अधिग्रहण के विरोध में जबलपुर-अमरकंटक हाईवे पर दो घंटे तक थमा रहा आवागमन
जनपथ टुडे डिंडौरी:- डिंडौरी में राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का विरोध अब तेज हो गया है। इसके विरोध में आज प्रभावित किसानों ने जोगी टिकरिया गांव के पास जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया। इस प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और करीब दो घंटे तक आवागमन पूरी तरह बाधित रहा। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने राज्यपाल के नाम एसडीएम राम बाबू देवांगन को एक ज्ञापन सौंपा। प्रशासनिक अधिकारियों की काफी समझाइश के बाद ही हाईवे पर यातायात दोबारा बहाल कराया जा सका।
ग्राम सभाओं की सहमति न लेने का आरोप
डूब प्रभावित किसान संघ के जिला अध्यक्ष ओमकार सिंह ने परियोजना प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े निर्माण कार्यों और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में अनुसूचित क्षेत्रों में लागू कानूनी प्रावधानों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। उनका आरोप है कि इस परियोजना के संबंध में जारी की गई अधिसूचनाओं और सुनवाई प्रक्रिया के दौरान स्थानीय ग्राम सभाओं की अनिवार्य सहमति बिल्कुल नहीं ली गई।
कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन की शिकायत
प्रभावित किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही शुरू करने से पहले स्थानीय लोगों को इस विषय में कोई पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने जो आपत्तियां दर्ज कराई थीं, उन्हें भी प्रशासन द्वारा गंभीरता से नहीं सुना गया। ग्रामीणों ने ‘भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013’ और अनुसूचित क्षेत्रों से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के लिए ग्राम सभा की सहमति मिलना कानूनी रूप से आवश्यक है, जिसे दरकिनार किया जा रहा है।
दस्तावेजों में की गई छेड़छाड़
किसानों ने केवल प्रक्रियाओं पर ही नहीं, बल्कि दस्तावेजी पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इस पूरी परियोजना की सुनवाई से जुड़े सरकारी दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं और कुछ संवेदनशील मामलों में लोगों के हस्ताक्षरों के साथ भी छेड़छाड़ की गई है। ज्ञापन सौंपने वाले किसान प्रतिनिधियों ने मांग की है कि प्रभावित आदिवासी और किसान परिवारों के अधिकारों की रक्षा की जाए, भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सभी कानूनी प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रभावित ग्रामीण आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा जाएगा मामला
इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए एसडीएम राम बाबू देवांगन ने बताया कि किसानों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन को गंभीरता से लिया गया है और इसे उचित निर्णय के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश और आश्वासन के बाद शाम साढ़े चार बजे किसानों ने अपना धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया, जिसके बाद नेशनल हाईवे पर आवागमन पूरी तरह सामान्य हो गया। इस चक्काजाम और धरना प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसडीओपी सतीश द्विवेदी, सिटी कोतवाली निरीक्षक दुर्गा प्रसाद नागपुरे और यातायात निरीक्षक सुभाष उईके सहित भारी संख्या में राजस्व और पुलिस बल मौके पर तैनात रहा।



