
प्रशासनिक अनदेखी की बलि चढ़ती डिंडोरी की सब्जी मंडी
संपादक प्रकाश मिश्रा
जनपथ टुडे डिंडोरी 29 जुलाई:- डिंडोरी जिला मुख्यालय की मुख्य सब्जी मंडी में जिस तरह खुलेआम मीट-मछली का कारोबार फल-फूल रहा है, वह न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा करता है, बल्कि नागरिक अधिकारों की अनदेखी का भी एक प्रत्यक्ष उदाहरण है। जिस परिसर को आम जनता के स्वास्थ्य, सहूलियत और ताजी सब्जियों की उपलब्धता के लिए सुरक्षित किया गया था, वहां आज गंदगी, दुर्गंध और अव्यवस्था का बोलबाला है। नियमों को ताक पर रखकर जारी यह कारोबार यह साबित करने के लिए काफी है कि स्थानीय प्रशासन की पकड़ व्यवस्था पर कितनी ढीली हो चुकी है।

राज्य शासन और खाद्य सुरक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि रिहाइशी इलाकों और सार्वजनिक सब्जी मंडियों में खुले में मांस की कटाई और बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इसके लिए स्वच्छता के कड़े मानक, बंद दुकानें और वैध लाइसेंस अनिवार्य हैं। लेकिन डिंडोरी की सब्जी मंडी में इन तमाम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग जो रोजमर्रा की सब्जियां खरीदने वहां पहुंचते हैं, उन्हें तीव्र दुर्गंध और गंदगी का सामना करना पड़ता है। खुले में फेंके जाने वाले मांस के अवशेषों से फैलने वाली मक्खियां और मंडराते आवारा पशु न केवल दृश्य को अत्यंत अरुचिकर और दयनीय बनाते हैं, बल्कि संक्रामक बीमारियों के फैलने का बड़ा जरिया भी बन रहे हैं।
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू स्थानीय नगर पालिका और जिला प्रशासन का रवैया है। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों द्वारा बार-बार लिखित व मौखिक शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं। कभी-कभार जनदबाव में नाममात्र की कार्रवाई कर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है, और कुछ ही दिनों बाद स्थिति फिर जस की तस हो जाती है। यह रवैया स्पष्ट तौर पर या तो प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है या फिर इस अवैध कारोबार को मिल रहे अप्रत्यक्ष संरक्षण की ओर इशारा करता है।
प्रशासन को यह समझना होगा कि समस्या मीट-मछली के व्यवसाय से नहीं, बल्कि उसके लिए गलत स्थान के चयन और नियमों के उल्लंघन से है। विगत 5 वर्षों में प्रशासन द्वारा कई बार इन्हें औरई बाईपास में स्थानांतरित करने का केवल प्रयास किया गया इस पर प्रशासन ने किसी भी तरह की कोई ठोस कार्रवाई नहीं करी है अब तक। यदि प्रशासन अब भी अपनी नींद से नहीं जागा, तो यह अव्यवस्था न केवल जनआक्रोश को भड़काएगी, बल्कि किसी बड़े स्वास्थ्य संकट को भी न्योता देगी। वक्त आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी कागजी बयानों से बाहर निकलकर जमीनी कारवाही को अंजाम दे।




