
जनसंवाद का सराहनीय प्रयास, लेकिन व्यवस्थाओं की पोल खोलती बारिश
संपादक प्रकाश मिश्रा
जनपथ टुडे डिंडोरी 3 अगस्त:- जिला प्रशासन द्वारा डिण्डौरी के नर्मदा घाट पर ‘जनसंवाद–जन चौपाल’ का आयोजन निस्संदेह सुशासन और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप जब कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया, अधिकारियों की फौज के साथ जनता के द्वार पहुँचीं, तो आम नागरिकों में भी एक नई आस जगी। सीमित संसाधनों में व्यावहारिक समाधान देने की जनता की पहल यह दर्शाती है कि लोग विकास में केवल दर्शक नहीं, बल्कि सहभागी बनने को तत्पर हैं।
किंतु, जिस जन चौपाल का मुख्य उद्देश्य शहर की जलभराव, नालियों के अवरुद्ध होने और जर्जर बुनियादी ढांचे जैसी समस्याओं पर चर्चा करना था, वही चौपाल बारिश में प्रशासनिक दूरदर्शिता के अभाव का शिकार हो गई।
मानसून और अनिश्चित मौसम के इस दौर में नर्मदा घाट जैसे खुले स्थान पर बिना किसी शेड या वाटरप्रूफ व्यवस्था के इतना बड़ा आयोजन करना प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। जैसे ही बारिश शुरू हुई, पूरी चौपाल को आनन-फानन में पास के मंदिर परिसर के अंदर स्थानांतरित करना पड़ा। एक तरफ जहाँ अधिकारी जनता को जलभराव और सुव्यवस्थित शहर की नसीहत दे रहे थे, वहीं दूसरी तरफ वे स्वयं एक छोटी सी बारिश से बचाव का ठोस इंतज़ाम करने में असमर्थ दिखे।
जन चौपाल का सकारात्मक संवाद
इस शुरुआती अव्यवस्था और मौसम के खट्टे अनुभव के बावजूद, जन चौपाल की मूल भावना और नागरिकों का उत्साह कम नहीं हुआ। मंदिर परिसर में स्थानांतरित होने के बाद भी वार्ड क्रमांक 08, 09 एवं 10 के रहवासियों ने न केवल अपनी बुनियादी समस्याओं—जैसे साफ-सफाई, पेयजल आपूर्ति, जर्जर बिजली के पोल और तंग सड़कों पर अतिक्रमण—को निडरता से उठाया, बल्कि उनके व्यवहारिक समाधान भी लिखकर प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया का सकारात्मक रुख बेहद उम्मीद जगाने वाला रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन स्वयं जनता के द्वार पर आकर समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। सभी प्राप्त शिकायतों व सुझावों को विधिवत दर्ज किया गया और आश्वासन दिया गया कि अगली चौपाल से पहले इनमें से अधिकांश समस्याओं का स्थायी निराकरण कर लिया जाएगा।
साथ ही, चौपाल के माध्यम से वार्डों में स्वीकृत और जारी विकास कार्यों का ब्योरा देना और करदाताओं से सहयोग की अपील करना, दोतरफा पारदर्शी संवाद का एक बेहतरीन उदाहरण है


