
ग्रामीणों के चंदे और श्रमदान से बनेगा प्राथमिक शाला का नया भवन – सरकारी व्यवस्था पर बड़ा सवाल? बात शिकारी टोला की

ग्रामीणों के चंदे और श्रमदान से बनेगा प्राथमिक शाला का नया भवन – सरकारी व्यवस्था पर बड़ा सवाल? बात शिकारी टोला की
संपादक प्रकाश मिश्रा
जनपथ टुडे डिंडोरी 2 जून2026 – एक ओर सरकार ग्रामीण शिक्षा को मजबूत बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है, तो दूसरी ओर आदिवासी बाहुल्य डिंडोरी जिले की यह तस्वीर उन दावों की हकीकत बयां करती है।
समनापुर विकासखंड के शिकारी टोला गांव में पिछले एक साल से ग्रामीण स्कूल भवन की मांग लेकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के चक्कर काटते रहे, लेकिन जब हर दरवाजे से सिर्फ़ आश्वासन मिला, तो गांव ने खुद ही जिम्मेदारी उठाने का फैसला कर लिया। ग्रामीणों ने हर घर से 500-500 रुपये का चंदा जुटाया और श्रमदान के जरिए प्राथमिक स्कूल का नया भवन बनाना शुरू कर दिया। दरअसल, गांव का सरकारी प्राथमिक स्कूल भवन जर्जर होने के कारण जिला प्रशासन के निर्देश पर गिरा दिया गया था। लेकिन भवन तो टूट गया, नया नहीं बना और न ही बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। आज हालात यह हैं कि पहली से पांचवीं तक के करीब 50 बच्चे एक निजी मकान के छोटे से कमरे में एक साथ पढ़ने को मजबूर हैं। ऐसे माहौल में पढ़ाई की गुणवत्ता का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि एक साल तक नेताओं और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद सिर्फ़ आश्वासन मिले। आखिरकार उन्होंने तय किया कि बच्चों का भविष्य इंतजार नहीं कर सकता। इसलिए अब गांव खुद अपने दम पर स्कूल बना रहा है। यह तस्वीर सिर्फ़ एक गांव की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर बड़ा सवाल है, जहां सरकारी स्कूल का भवन बनाने की जिम्मेदारी आखिरकार ग्रामीणों को खुद उठानी पड़ रही है।

