
डिंडोरी के जंगलों पर साल बोरर का हमला: डेढ़ लाख से अधिक सरई के पेड़ प्रभावित, कीट पकड़ो अभियान तेज
डिंडोरी के जंगलों पर साल बोरर का हमला: डेढ़ लाख से अधिक सरई के पेड़ प्रभावित, कीट पकड़ो अभियान तेज
संपादक- प्रकाश मिश्रा
जनपथ टुडे डिंडोरी 17 जुलाई 2026- डिंडोरी जिले के जंगलों में लगभग तीन दशक बाद एक बार फिर साल बोरर (Sal Borer) कीट का गंभीर प्रकोप सामने आया है। वर्ष 1997-98 के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर सरई (साल) के पेड़ों पर कीट का हमला दर्ज किया गया है। वन विभाग के अनुसार करीब 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले 1 लाख 46 हजार 784 सरई के पेड़ इस कीट से प्रभावित पाए गए हैं। भारत सरकार से अनुमति मिलने के बाद इन चिन्हित पेड़ों की वैज्ञानिक तरीके से कटाई की जाएगी, जबकि फिलहाल जंगलों में कीटों को पकड़ने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
20 जून से 30 जुलाई तक चलेगा “कीट पकड़ो अभियान”
वन विभाग ने ग्रामीणों की भागीदारी से 20 जून से 30 जुलाई तक विशेष अभियान शुरू किया है। पूर्व करंजिया, पश्चिम करंजिया, दक्षिण समनापुर और बजाग वन परिक्षेत्र में ग्रामीण सुबह तड़के साल बोरर कीटों को पकड़ रहे हैं। अब तक लगभग 10 लाख कीटों का संग्रह किया जा चुका है।
वन विभाग ने प्रत्येक कीट के सिर पर 2 रुपये की प्रोत्साहन राशि तय की है। ग्रामीण कीटों के सिर की माला बनाकर संग्रहण केंद्रों पर जमा कर रहे हैं, जिसके भुगतान की राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी।
ऐसे पकड़े जाते हैं साल बोरर कीट
एसडीओ एस.के. जाटव ने बताया कि अभियान के तहत दो हेक्टेयर क्षेत्र में एक साल के पेड़ को काटकर उसकी छाल को पीटा जाता है। छाल से निकलने वाली गंध से लगभग तीन किलोमीटर दूर तक मौजूद साल बोरर कीट आकर्षित होकर रस पीने पहुंच जाते हैं। रातभर रस पीने के बाद कीट सुबह सुस्त अवस्था में होते हैं, जिन्हें सुबह 5 से 7 बजे के बीच ग्रामीण आसानी से पकड़ लेते हैं। सूर्योदय के बाद कीट फिर उड़ने लगते हैं।
भारत सरकार की अनुमति के बाद होगी पेड़ों की कटाई
उत्पादन वन मंडल की डीएफओ भारती ठाकरे ने बताया कि सामान्य वन मंडल द्वारा प्रभावित 1,46,784 पेड़ों की मार्किंग पूरी कर ली गई है। अब भारत सरकार से अंतिम अनुमति मिलने का इंतजार है। अनुमति मिलते ही लगभग 15 हजार अत्यधिक प्रभावित पेड़ों की प्राथमिक कटाई शुरू की जाएगी और पूरी प्रक्रिया में करीब तीन माह का समय लगेगा।
इस कार्य के लिए सामान्य, उत्पादन, मंडला वेस्ट और मंडला ईस्ट वन मंडलों के अधिकारियों की संयुक्त टीम तैनात की जाएगी।

हजारों घनमीटर लकड़ी मिलने की संभावना
वन विभाग के अनुसार इस प्रक्रिया में लगभग 46,390 चट्टे इमारती लकड़ी तथा 43,390 चट्टे जलाऊ लकड़ी प्राप्त होने की संभावना है। लकड़ी को गढ़ा सरई और करंजिया काष्ठागार में सुरक्षित रखा जाएगा तथा बाद में ई-ऑक्शन के माध्यम से नीलाम किया जाएगा।
पांच संग्रहण केंद्र बनाए गए
ग्रामीणों से संग्रहित कीटों को जमा करने के लिए खारीडीह, चौरादादर, कबीर, जगतपुर और करंजिया में पांच संग्रहण केंद्र बनाए गए हैं। अभियान समाप्त होने के बाद 30 जुलाई के बाद दो डीएफओ अधिकारियों की उपस्थिति में सभी एकत्रित कीटों का वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया जाएगा।
वन विभाग का कहना है कि यह अभियान साल बोरर कीट के प्रसार को रोकने और डिंडोरी के सरई वनों को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो जंगलों को व्यापक नुकसान हो सकता है।


