
मोमबत्तियों की लौ से संघर्ष और जीत का उजाला: डिंडोरी में NSUI का कैंडल मार्च
✍️ उपसंपादक मोहम्मद साहिब
जनपथ टुडे डिंडोरी 25 जुलाई:- भारत माता चौक डिंडोरी में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के नेतृत्व में एक कैंडल मार्च निकाला गया। यह प्रदर्शन सिर्फ एक जुलूस नहीं था, बल्कि अन्याय के खिलाफ युवाओं के संगठित आक्रोश और आखिरकार मिली एक बड़ी जीत का प्रतीक था। यह कैंडल मार्च उन अनगिनत बेकसूर छात्र-छात्राओं की पावन स्मृति में निकाला गया, जिन्होंने पेपर लीक और गिरते परीक्षा सिस्टम की भेंट चढ़कर हताशा में अपना जीवन त्याग दिया था।
कैंडल मार्च के दौरान NSUI के जिला अध्यक्ष प्रियांशु परस्ते ने पूरे आंदोलन और जीत की रूपरेखा रखते हुए कहा:
दिल्ली के जंतर-मंतर पर विगत 36 दिनों से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट (NEET) धांधली के खिलाफ जो आंदोलन चल रहा था, आज 36 दिनों के कड़े संघर्ष के बाद हमने यह जीत दर्ज की है। आज हम सभी छात्र एकजुट होकर उसी जीत की खुशी मना रहे हैं। इसके साथ ही, नीट परीक्षा और पेपर लीक के कारण जिन हमारे होनहार भाई-बहनों की जान गई, आज हमने भारत माता चौक पर मोमबत्तियां जलाकर उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है।
वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पर्चा लीक होने की घटनाएं देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करती आ रही हैं। जब महीनों और सालों तक दिन-रात एक करके मेहनत करने वाले छात्रों के हाथ सिर्फ निराशा और भ्रष्टाचार लगता है, तो उनका मनोबल टूट जाता है। दुखद बात यह है कि इसी व्यवस्थागत नाकामी के कारण कई होनहार युवाओं को आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।
डिंडोरी में जलाए गए इन कैंडलों में सिर्फ उन दिवंगत छात्रों को श्रद्धांजलि देने का भाव नहीं था, बल्कि एक न्यायपूर्ण लड़ाई के सफल होने का जश्न भी शामिल था। आज की यह जीत इस बात का प्रमाण है कि जब युवा छात्र-छात्राएं एकजुट होकर अपने हक की आवाज बुलंद करते हैं, तो सत्ता और प्रशासन को जवाबदेह बनना ही पड़ता है। पेपर लीक के खिलाफ सख्त कदम उठाना और छात्रों के हक में फैसला आना उन तमाम संघर्षों की परिणति है जो सड़कों से लेकर अदालतों तक लड़े गए।
यह कैंडल मार्च उन परिवारों के लिए भी एक सांत्वना है, जिन्होंने अपने मासूम बच्चों को खोया है। यह संदेश देता है कि उनके बच्चों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया, उनकी शहादत ने आज एक ऐसी अलख जगाई है जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था की राह हमवार हुई है।



