
कुकर्रामठ ऋणमुक्तेश्वर धाम में ‘हर-हर महादेव’ की गूँज स्वामिभक्त श्वान की अनोखी गाथा आज भी जीवंत – सावन के पहले सोमवार ऋणमुक्तेश्वर धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
सावन के पहले सोमवार ऋणमुक्तेश्वर धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
संपादक प्रकाश मिश्रा
जनपथ टुडे डिंडोरी 3 अगस्त2026 – सावन माह के प्रथम सोमवार पर डिंडौरी जिले के प्रसिद्ध ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित प्राचीन कुकर्रामठ धाम में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक मां नर्मदा से कांवड़ में जल भरकर पैदल यात्रा करते हुए ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की।
अनोखी लोकगाथा के लिए भी प्रसिद्ध है मंदिर
यह मंदिर अपनी प्राचीनता के साथ-साथ एक अनोखी लोकगाथा के लिए भी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि प्राचीन काल में एक व्यापारी ने अपना प्रिय श्वान साहूकार के पास गिरवी रख दिया था। बाद में उसी स्वामिभक्त श्वान ने चोरों से व्यापारी का धन वापस दिलाया, लेकिन गलतफहमी में व्यापारी ने अपने ही वफादार श्वान की हत्या कर दी। सच्चाई सामने आने पर पश्चाताप में व्यापारी ने उसी स्थान पर श्वान की स्मृति में यह मंदिर बनवाया। इसी कारण इस स्थान का नाम कुकर्रामठ पड़ा, जहां ‘कुकर’ का अर्थ श्वान माना जाता है।
इसके साथ ही एक और मान्यता यह भी है कि कल्चुरी काल में पांडवों ने एक ही रात में इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर की प्राचीन स्थापत्य कला और धार्मिक महत्व इसे जिले के प्रमुख शिवधामों में शामिल करते हैं।
सावन के पहले सोमवार पर मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, ऋणमुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की। स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गईं।



