मानसून पूर्व बाढ़ आपदा तैयारियों की समीक्षा: कमिश्नर धनंजय सिंह भदौरिया ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दिए कड़े निर्देश

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✍️ उपसंपादक मोहम्मद साहिब

जनपथ टुडे डिंडोरी 4 जून:- आगामी वर्षा ऋतु और संभावित बाढ़ की परिस्थितियों को देखते हुए जिला व संभाग प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है।

मानसून पूर्व बाढ़ आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा के लिए आज, 04 जून 2026 को शाम 5 बजे जबलपुर संभाग के कमिश्नर धनंजय सिंह भदौरिया की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मानसून के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए सभी विभागों को पूरी तैयारी के साथ मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं।

संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और बांधों के जलस्तर पर विशेष चर्चा

बैठक के दौरान जिले के बाढ़ प्रभावित और अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों के आकलन पर विस्तार से बात की गई। कमिश्नर ने बड़े बांधों की वर्तमान जल भंडारण क्षमता और उनके मौजूदा जलस्तर की समीक्षा की। इसके साथ ही, मानसून के दौरान बांधों के गेट खोले जाने की स्थिति में प्रभावित होने वाले निचले गांवों और क्षेत्रों की सूची तैयार कर वहां पहले से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने को कहा गया। बैठक में बाढ़ के प्रमुख कारणों, मजबूत सूचना तंत्र, पूर्व चेतावनी (अर्ली वार्निंग सिस्टम) तथा आपातकालीन कार्ययोजना की भी बारीकी से समीक्षा की गई।

अंतर्विभागीय समन्वय और राहत सामग्री के भंडारण पर जोर

आपदा के समय राहत कार्यों में कोई रुकावट न आए, इसके लिए विभिन्न सरकारी विभागों के बीच आपसी समन्वय को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया। कमिश्नर ने निर्देश दिए कि संभावित बाढ़ वाले क्षेत्रों में खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण पहले ही कर लिया जाए। इसके अलावा:

  1. दवाइयों की उपलब्धता और चिकित्सा दलों की आपात तैनाती।
  2. पशुओं की सुरक्षा के लिए पशु चिकित्सा सेवाएं।
  3. शुद्ध पेयजल की आपूर्ति, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन।
  4. अस्थायी राहत शिविरों (शेल्टर होम) की एडवांस बुकिंग और वहां बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना।

जर्जर भवनों का चिन्हांकन और बचाव उपकरणों की टेस्टिंग

बैठक में सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए वर्षा पूर्व जिले के सभी जर्जर व खतरनाक भवनों को चिन्हित कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने की बात कही गई। इसके साथ ही, आपदा नियंत्रण केंद्रों (कंट्रोल रूम) को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने, नोडल अधिकारियों का नामांकन करने, बचाव कार्य में उपयोग होने वाले उपकरणों (नाव, लाइफ जैकेट आदि) की जांच करने और बचाव दलों (रेस्क्यू टीम) को विशेष प्रशिक्षण देने के बिंदुओं पर भी गंभीर चर्चा हुई। प्रशासन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि मानसून अवधि में संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में यह वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में डिंडोरी जिला मुख्यालय से कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया, सीईओ जिला पंचायत दिव्यांशु चौधरी, अपर कलेक्टर जेपी यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित वर्मा, डिप्टी कलेक्टर वैधनाथ वासनिक और प्रशिक्षु डीएफओ सहित तमाम संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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