
नियम विरुद्ध पदोन्नति सूची का आरोप: विधायक ओमप्रकाश धुर्वे से मिले वनकर्मी

विधायक ने दिया आश्वासन कहा जरूरत पड़ी तो विधानसभा में रखेगें बात
संपादक:- प्रकाश मिश्रा
जनपथ टुडे, डिंडौरी- 17 जुलाई 2026- डिंडौरी जिले में हाल ही में जारी वन विभाग की पदोन्नति सूची को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शुक्रवार को पदोन्नति प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाते हुए जिले के वनकर्मियों का प्रतिनिधिमंडल शहपुरा से भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे से उनके आवास पर मिला और अपनी समस्याओं से अवगत कराया। विधायक ने वनकर्मियों की बात गंभीरता से सुनते हुए मुख्यमंत्री एवं प्रमुख सचिव से चर्चा करने का आश्वासन दिया। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाने की बात भी कही। वनकर्मियों का दावा है कि 13 जुलाई 2026 को जारी पदोन्नति सूची विभागीय नियमों के अनुरूप तैयार नहीं की गई, जिससे जिले के करीब 75 वनकर्मी प्रभावित हुए हैं।
वरिष्ठता और विभागीय नियमों की अनदेखी
वनरक्षक ज्योति सरोज धुर्वे ने बताया कि विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2025 की वरिष्ठता सूची के आधार पर की जानी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उनका आरोप है कि कर्मचारियों से वसूली की गणना की अवधि भी जनवरी से दिसंबर 2025 तक सीमित होनी चाहिए थी, जबकि अधिकारियों ने इसमें जनवरी से जुलाई 2026 तक की अवधि जोड़ दी। इससे कई पात्र वनकर्मी पदोन्नति से वंचित हो गए। वनकर्मियों का यह भी आरोप है कि विभाग ने संबंधित कर्मचारियों को वसूली का कोई नोटिस जारी नहीं किया और सीधे वेतन से राशि काट ली गई। कई कर्मचारियों से 140 रुपये, 200 रुपये जैसी मामूली राशि की कटौती होने के कारण उन्हें पदोन्नति सूची से बाहर कर दिया गया।
1999 से 2008 बैच के वनरक्षक हुए प्रभावित
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि वर्ष 1999 से 2008 के बीच भर्ती हुए कई वनरक्षकों को पदोन्नति का लाभ नहीं मिला, जबकि उनके बाद नियुक्त कुछ कर्मचारियों को पदोन्नत कर दिया गया। उनका आरोप है कि फील्ड में कार्यरत कर्मचारियों की अनदेखी कर कार्यालयों में पदस्थ कर्मचारियों को प्राथमिकता दी गई है।
विधायक बोले— छोटे आर्थिक दंड के आधार पर वंचित करना उचित नहीं
भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने वनकर्मियों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि करीब 11 वर्ष बाद पदोन्नति की प्रक्रिया हुई है। ऐसे में फील्ड में कठिन परिस्थितियों में कार्य करने वाले कर्मचारियों को मामूली आर्थिक दंड के आधार पर पदोन्नति से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि वे इस विषय पर मुख्यमंत्री और वन विभाग के प्रमुख सचिव से चर्चा करेंगे। यदि आवश्यक हुआ तो विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा।
निष्पक्ष जांच और सूची की समीक्षा की मांग
वनकर्मियों ने विभाग से पदोन्नति सूची की पुनः समीक्षा कर विभागीय नियमों के अनुरूप संशोधित सूची जारी करने की मांग की है। अब सभी की निगाहें वन विभाग और राज्य शासन पर टिकी हैं कि प्रभावित कर्मचारियों की शिकायतों पर क्या निर्णय लिया जाता है।
