
डिंडौरी नगर परिषद फिर विवादों में, सरकारी फाइलों में बन गया मकान
नगर परिषद डिंडौरी पर गंभीर आरोप: पीएम आवास सूची से नाम हटाने और हेराफेरी की कलेक्टर से शिकायत, निष्पक्ष जांच की मांग
उपसंपादक मोहम्मद साहिब
जनपथ टुडे डिंडौरी 15 जून- प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर नगर पालिका डिंडौरी एक बार फिर विवादों और सवालों के घेरे में आ गई है। इस बार मामला एक पात्र हितग्राही का नाम सूची से हटाकर किसी अन्य को लाभ पहुंचाने की आशंका और गंभीर हेराफेरी के आरोपों से जुड़ा है। मामले को लेकर वार्ड क्रमांक 14 पुरानी डिंडौरी निवासी संतोष कुमार ठाकुर ने कलेक्टर डिंडौरी को एक लिखित आवेदन सौंपकर निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और अपने आवास का कब्जा दिलाने की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
आवेदक संतोष कुमार ठाकुर के अनुसार, वे पुरानी डिंडौरी के वार्ड क्रमांक 14 के स्थायी निवासी हैं और वर्तमान में एक कच्चे मकान में रह रहे हैं। योजना की सभी शर्तों को पूरा करने के कारण उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन किया था। आवेदन के साथ उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज और शपथ पत्र भी जमा किया था।
संतोष कुमार ने बताया कि आवेदन के बाद नगर परिषद की टीम ने मौके पर आकर उनके निवास स्थल की जांच की थी और मकान के फोटो भी लिए थे। जांच के बाद उन्हें पूरी उम्मीद थी कि उनका पक्के मकान का सपना सच हो जाएगा। लेकिन, बाद में उन्हें झटका तब लगा जब उन्हें पता चला कि हितग्राही सूची से उनका नाम गायब है और उनके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज कर दिया गया है। आरोप है कि नगर पालिका के ही किसी कर्मचारी ने इस गड़बड़ी को अंजाम दिया।
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत और नगर परिषद का अजीब दावा
सूची में नाम न होने पर पीड़ित ने शासन की हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के जवाब में मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा जो जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, उसने मामले को और उलझा दिया। प्रतिवेदन में दावा किया गया कि आवेदक संतोष कुमार को पूर्व में ही प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जा चुका है और वार्ड क्रमांक 15 में उनके नाम पर एक पक्का मकान निर्मित है। इसी रिपोर्ट के आधार पर उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया।
अगर पक्का मकान बना है, तो उसका कब्जा कहां है? – आवेदक का सवाल
आवेदक संतोष कुमार ने नगर परिषद के इस दावे को पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत करार दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें आज तक किसी भी सरकारी योजना के तहत आवास का कब्जा नहीं मिला है।
“यदि नगर परिषद के कागजों में मेरे नाम पर कोई आवास स्वीकृत और निर्मित है, तो प्रशासन यह स्पष्ट करे कि वह मकान जमीन पर कहां स्थित है? उसका कब्जा वर्तमान में किसके पास है? मुझे उस मकान से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं।”
आवेदक ने आशंका जताई है कि उनके नाम पर स्वीकृत राशि और आवास का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति को अवैध रूप से लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है, जो कि एक बड़ा घोटाला हो सकता है। – संतोष कुमार ठाकुर, आवेदक
कलेक्टर से पुनः जांच और कार्रवाई की मांग
संतोष कुमार ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि नगर परिषद डिंडौरी द्वारा सौंपे गए जांच प्रतिवेदन और मौके की वास्तविक स्थिति की दोबारा निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि कागजों में उनके नाम पर आवास स्वीकृत है, तो उन्हें उसका विधिवत कब्जा दिलाया जाए। साथ ही, इस पूरी अनियमितता में शामिल नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए
इनका कहना है कि
जन प्रतिनिधि का कहना है कि इन्हें आवास मिलना मिलना चाहिए, जिस पर कारवाही भी हो चुकी है परन्तु आज तक इन्हें कोई भी लाभ नहीं मिला है।



