पशु चिकित्सालय परिसर में खुले में जलाई जा रही एक्सपायरी डेट की दवाइयां – साहब कहते हैं मुझे कोई जानकारी नहीं

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पशु चिकित्सालय परिसर में खुले में जलाई जा रही एक्सपायरी डेट की दवाइयां – साहब कहते हैं मुझे कोई जानकारी नहीं

संपादक प्रकाश मिश्रा 
जनपथ टुडे डिंडोरी 11 मार्च 2026 – जिला पशु चिकित्सालय इन दिनों भ्रष्टाचार और लापरवाही का अड्डा बना हुआ है। अस्पताल में पदस्थ स्टाफ और जिम्मेदार अधिकारी मनमानी करने पर उतारू है। पशुपालकों के द्वारा लगातार मिल रही शिकायतें और पशु चिकित्सालय प्रशासन के रवइये को लेकर आम लोगों में अच्छा खासा आक्रोश देखा जा रहा है।

अभी ताजा मामला गुरुवार को देखने में आया जहां अस्पताल परिसर में खुले तौर पर बड़ी मात्रा में एक्सपायरी डेट की दवाइयां को जलाया जा रहा था जिससे गहरा काला दुर्गंध और प्रदूषण युक्त धुआं पूरे नगर में फैल रहा है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयां को नष्ट करने की आनन फानन में आखिर क्या आवश्यकता पड़ी। जबकि दवाओं के विनिस्ट्री करण की एक संपूर्ण गहन प्रक्रिया है जिसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी सम्मिलित किया जाना जरूरी है। मामले में जब पशु चिकित्सा उपसंचालक एचपी शुक्ला से जानकारी ली गई तो उनका कहना था कि क्या हो रहा है मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है उन्हें अस्पताल परिसर में उनके चैंबर के ठीक पीछे जलाई जा रही दवाइयां के बारे में बताया गया तो उन्होंने कहा कि मेरी आंखें चारों तरफ नहीं घूमती है मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है सवाल यह है कि अधिकारी चेंबर में बैठे हुए हैं खुले आसमान के नीचे जहरीली दवाइयां को जलाया जा रहा है जिससे निश्चित तौर पर मानव स्वास्थ्य बुरी तरह से प्रभावित होगा और अधिकारी इतने बेपरवाह है कि परिसर में क्या हुआ है हो रहा है इसका उन्हें भान भी नहीं है।

क्या कहते हैं एक्सपायरी डेट की दवाओं का विनष्टीकरण के नियम

पशु चिकित्सालय में एक्सपायरी डेट की दवाओं को ‘बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन’ नियमों के तहत, उनके प्रकार (ठोस, तरल, सीरिंज) के अनुसार अलग-अलग चिन्हित कंटेनरों में रखकर, अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से भस्मीकरण (Incineration) या लैंडफिल द्वारा नष्ट किया जाता है। इनके निपटान के लिए विस्तृत रिकॉर्ड रखना और उपयोग वाली दवाओं से इन्हें अलग रखना अनिवार्य है।

विस्तृत प्रक्रिया इस प्रकार है:

अलग करना (Segregation): एक्सपायर हो चुकी दवाओं को उपयोग में आने वाली दवाओं से तुरंत अलग करें और उन पर स्पष्ट “एक्सपायर/नष्ट करने हेतु” लेबल लगाएं।

वर्गीकरणः दवाओं को ठोस (गोलियां), तरल (सीरप), और खतरनाक अपशिष्ट (एंटीबायोटिक्स, एनेस्थेटिक्स) के रूप में छांटें।
सुरक्षित भंडारणः दवाओं को सुरक्षित और सुरक्षित स्थान पर रखें, जहाँ पहुंच न हो।

निपटान विधियाँ (Disposal Methods):

भस्मीकरण (Incineration): अधिकांश दवाओं के लिए, एक अधिकृत अपशिष्ट प्रबंधन कंपनी के माध्यम से उच्च तापमान पर जलाना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।

लैंडफिल (Landfill): सुरक्षित और नियंत्रित लैंडफिल स्थलों का उपयोग करना चाहिए।

दस्तावेजीकरण (Documentation): विनाश की प्रक्रिया, दवा का नाम, मात्रा और तारीख का विस्तृत रिकॉर्ड रखें।

इनका कहना है
स्थानीय पार्षद का कहना है कि पशु चिकित्सालय में लापरवाही चरम पर है यहां पर भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए बड़ी मात्रा में एक्सपायरी हो चुकी दवाइयां को मनमानी तरीके से जलाया जा रहा है इस तरह खुले परिसर में एक्सपायरी डेट की दवाइयां को जलाना मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। प्रशासन को विभाग की इस बड़ी लापरवाही के लिए कानूनी तौर पर कार्रवाई करते हुए जिम्मेदारी निश्चित करनी चाहिए।

ज्योतिरादित्य भलावी
पार्षद नगर परिषद डिंडोरी

इनका कहना है

युवा समाजसेवी और पशु प्रेमी शुभम पांडे ने बताया कि आज सुबह वह जरूरी काम से पशु चिकित्सालय आए थे और इसी समय स्टाफ के द्वारा कार से दवाइयां को निकाल कर खुले में रखकर जलाया जा रहा था। जब उन्होंने इस विषय में जानकारी मांगी तो स्टाफ ने पहले तो उन्हें यह कहकर मन कर दिया कि आपको इससे कोई लेने देने नहीं है और यह कचरा है जिसे जलाया जा रहा है। सवाल यह है कि यदि कार से निकाल कर दवाइयां जलाई जा रही है तो उनके विनिष्टीकरण करण की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई । कौन सी दवाइयां जलाई जा रही है कौन किस उपयोग की है इसका व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया जाना चाहिए । किंतु पशु चिकित्सालय प्रशासन खुलेआम मनमानी और भ्रष्टाचार करने पर उतारू है।

शुभम पांडे
युवा समाजसेवी एवं पशु प्रेमी

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