
सागरटोला में एक-एक बूंद को तरस रहे ग्रामीण: ग्रामीणों ने किया चक्का जाम
✍️ उपसंपादक मोहम्मद साहिब 9406850186
जनपथ टुडे डिंडोरी 23 मई:— एक ओर जहाँ डिंडोरी जिला प्रशासन ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ में अपनी सफलता का बखान करते हुए इसे प्रदेश में ‘टॉप’ पर बता रहा है, वहीं दूसरी ओर धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। जिले के बजाग विकासखंड की करौंदा ग्राम पंचायत के सागरटोला गाँव में पानी की भीषण किल्लत से आक्रोशित ग्रामीणों ने आज चक्का जाम कर दिया।
करौंदा सागरटोला के ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि गाँव में पेयजल की समस्या विकराल हो चुकी है और लोग एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। महिलाओं और बच्चों को दूर दराज जा कर अपने लिए पानी लाना पड़ता है।
यातायात हुआ बाधित, प्रशासन में हड़कंप
ग्रामीणों द्वारा मुख्य मार्ग पर किए गए चक्का जाम के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। चक्का जाम की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को शांत कराने का प्रयास किया और समस्या का जल्द समाधान करने का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों के बड़े सवाल
यह घटना जिले के प्रशासनिक दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। जब एक जिला जल संरक्षण में अव्वल होने का दावा कर रहा हो, तब उसी जिले के सुदूर गांवों में पेयजल संकट का होना प्रशासन की कार्यप्रणाली की पोल खोलता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या प्रशासन केवल फोटोग्राफी आंकड़ों की बाजीगरी में लगा रहेगा या वास्तव में सागरटोला के ग्रामीणों को पानी उपलब्ध करा पाएगा।
बड़े अधिकारी लगा रहे हैं नीचे अमले पर लापरवाही का आरोप
बूंद बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण ने जब हालातो से परेशान होकर मुख्य मार्ग को जाम करते हुए प्रदर्शन के लिए तैयार हो गए तब विभाग के जिम्मेदार अधिकारी स्थानीय स्तर पर काम करने वाले छोटे कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए गलती का ठीकरा फोड़ रहे हैं। प्राय देखा जाता है । कि जहां कहीं पेयजल की समस्या को लेकर कोई प्रदर्शन होता है वहां ठेकेदार को ही जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है जबकि सभी कार्यों में प्रशासन के अधिकारी सतत निरीक्षण करते हैं यदि समय रहते समस्या को चिन्हित कर लिया जाए तो इस प्रकार के प्रदर्शन की आवश्यकता शायद ग्रामीणों को ना पड़े।
